भाईचारे की मिसाल है यह गाँव, सावन भर मुस्लिम नहीं खोलते मांस की दूकान, करते हैं कावड़ियों की सेवा

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इस वक़्त जहाँ एक तरफ कश्मीर और देश के अन्य इलाकों में जाती-पाती और धर्म के नाम पर यद्ध सा छिड़ा है वहीँ मेवात का घासेड़ा गाँव दशकों से हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे की मिसाल पेश कर रहा है, मुस्लिम बाहुल्य मेवात में हर बार की तरह ही इस बार भी कावड़ियों के लिए विशेष इंतजाम किये गए हैं, यहाँ के हिन्दू – मुस्लिम गाँव वाले कावड़ियों की हर संभव मदद के लिए तैयार रहते हैं |

गाँव के लोगों के बीच सावन और कांवड़ यात्रा के प्रति इतनी श्रद्धा है कि गाँव के हिन्दू और मुस्लिम समुदाय मिलकर पूरे सावन के महीने भर ना सिर्फ गाँव की सड़कों को साफ़-सुथरा रखते हैं बल्कि इस पूरे महीने गाँव में कोई मांस की दूकान नहीं लगाता |

गाँव ने कावड़ियों की मदद के लिए एक कमेटी भी बनाई हुई है, यह कमेटी कावड़ियों को बिना किसी असुविधा के यात्रा पूरी करने में सहयोग करती है, कावड़ियों के गाँव में प्रतिवर्ष शिविर भी लगाया जाता है, जिसमे दोनों ही समुदाय के लोग मिलकर काम करते हैं |

कमेटी के मुस्लिम सदस्यों का कहना है कि दुनिया के सभी मजहब हमें मोहब्बत सिखाते हैं और दुनिया के सभी बन्दे एक ही मलिक की औलाद हैं, वहीँ हिन्दू समुदाय के लोगों का कहना है हमारा आपसी प्यार और सौहार्द वास्तव में मिसाल है और दुनिया को इसे अपनाना चाहिए |

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