जिले में जोरो पर हो रहा है सिंथेटिक दूध का धंधा

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मैनपुरी। बच्चों के लिये दूध अमृत है तो बीमारी के लिये संजीवनी लेकिन अब इस सुधा को जहर में तब्दील कर दिया गया है। सिंथेटिक दूध बनाने वालेदूध में रसायन मिला रहे है। कभी यहां दूध की नदियां बहती थी वहीं इस गोरख धंधे से जुड़े लोग मोटी कमाई के चक्कर में मीठा जहर बेच रहे है।
मैनपुरी जिले में दूध का कारोबार का मतलब ही मिलावट का हो चुका है। स्थित इस बात समझी जा सकती है कि जब एक ग्राहक अपने दूध वाले से कहता कि भैया पानी के अलावा तो कुछ नहीं मिलाते उसकी यह बात इसलिये है कि वह पानी की मिलावट को तो मानसिक रूप से तैयार हो चुका है। मगर रसायनोंसे तैयार किया हुआ दूध ग्राहक लेने से कतरा रहा है। वहीं हकीकत ये है कि विक्रेता भी अब पानी कम सिंथेटिक दूध ज्यादा बेच रहे है। दूध के धंधे से जुड़े कुछ जानकार लोगों का कहना है कि यूरिया खाद और रसायनिक पदार्थ मिलाकर ये दूध तैयार किया जाता है। एक चिकित्सक का तो यहा तक कहना है कि इस सिंथेटिक दूध को पिलाने से बच्चें के मस्तिक पर बुरा असर पडता है। उसकी याददाश्त भी जा सकती है तथा गेस्ट्रो एट्रायटिस जैसी गम्भीर बीमारी हो सकती है। जिले में इस गोरख धंधे से जुडे लोग सिर्फ शहर में ही नहींग्रामीण क्षेत्रों में भी इसका कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। खाद्य विभाग भी सब कुछ जानते हुये भी कारवाई करने से आखिर क्यो बच रहा हैं। प्रशासन की अनदेखी के चलते ये गोरखधंधा कुटीर उद्योग का रूप लेता जा रहा है। प्रशासन ने इस ओर अगर कोई ठोस कदम नहीं उठाये तो आने वाले परिणाम अच्छे नहीं होगे।
रिपोर्ट – दीपक शर्मा

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