टी बी का प्रकोप या फिर अभिशाप, प्रशाशन को भनक तक नही

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⁠⁠⁠⁠⁠सुल्तानपुर(ब्यूरो)- एक ऐसा परिवार, जो अपने कलेजे के टुकड़ों को तिल-तिल कर मरते देखने को विवश है। वजह सिर्फ यह कि निजी और महंगे अस्पतालों में इलाज कराना उनके वश की बात नही। केन्द्र और प्रदेश सरकार की तमाम योजनाओं के बावजूद गरीब परिवारों को स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ नही मिल पा रहा है।

ताजा मामला तहसील के शेखनपुर गांव का है। गांव के एक गरीब परिवार पर बीते दो साल से संकट में है। परिवार के तीन सदस्यों की मौत टीवी नामक बीमारी से हो चुकी है, जबकि 15 वर्षीय बिटिया इस बीमारी से जूझ रही है।हालात यह है कि तंगी से जूझ रहा यह परिवार सिर्फ सरकारी अस्पताल पर निर्भर है। इस परिवार की हालत इतनी खराब है कि वह किसी अच्छे अस्पताल में बीमारों का इलाज नही करा पा रहा है।

तहसील क्षेत्र के शेखनपुर गांव मे कालीचरन का परिवार रहता है। करीब तीन साल पहले इस परिवार को किसी की नजर लग गयी। उनके दो बेटे हृदय राम पाल व रंजीत पाल है। रंजीत पाल की पत्नी बीमार हुई। इलाज के दौरान उसके टी बी ग्रस्त होने की जानकारी मिली।

लोगों की सलाह पर उनका इलाज इलाहबाद के सरकारी टीबी हॉस्पिटल में होने लगा। साथ मे ही रहने से रंजीत की भी तबीयत खराब रहने लगी। जांच हुई तो उसे भी टी बी की बीमारी का पता चला। दोनो पति-पत्नी का ईलाज होने लगा आर्थिक तंगी के कारण समय से उपचार नही होने के कारण पत्नी अनीता ने 19 दिसम्बर 2015 को दम तोड़ दिया।

पत्नी की मौत के बाद रंजीत की भी तबीयत दिनों दिन खराब होती गयी। इलाज के अभाव मे रंजीत की भी मौत बीते साल 20 अक्टूबर 2016 को.हो गयी। माता-पिता की मौत से रंजीत के चार बच्चे अनाथ हो गये। वही बूढ़े दादा – दादी के कन्धो पर रंजीत के चारो बच्चों की जिम्मेदारी आ गयी। बीमारी यही नही रुकी । टीबी ने जैसे इस परिवार को अपना घर बना लिया हो।

अब बडे़ भाई के भी परिवार को भी इस बीमारी ने अपने आगोश मे ले लिया। हृदय पाल ने भी अपने सोलह बर्षीय बेटे का टी बी का बहुत ईलाज कराया, लेकिन बीती दो अप्रैल को ईलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गयी।

बेटी आसमा भी इसी बीमारी से ग्रस्त है। परिवार के ही ह्रदय राम पाल ने बताया कि धन के अभाव में किसी अच्छे अस्पताल में इलाज नही करा पा रहे हैं।

उधर, स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ पी एल गुप्ता ने बताया, कि उन्हें इस बाबत कोई जानकारी नही है। चूंकि मरीजो का इलाज गैर जनपद से हो रहा है, इसलिये स्थानीय अस्पताल में कोई रिकॉर्ड भी नही है।

फिर भी इस मामले को वे दिखवाएंगे और जरूरत पड़ी तो हरसम्भव मदद की जायेगी।

रिपोर्ट-संतोष यादव

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