शिक्षक दिवस – 5 सितंबर को ही क्यों ? जानें

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dr. sarvpalli radhakrashnan
यूनेस्को द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में सामाजिक विज्ञान पर व्याख्यान देते हुए डाक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन 15 फरवरी 1954

भारत के पहले उपराष्ट्रपति डाक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 ई. को हुआ था I वह एक आदर्श शिक्षक, भारतीय संस्कृति और सभ्यता के संवाहक, महान शिक्षाविद, दार्शनिक और सबसे बेहतर हिन्दू धर्म के सर्वश्रेष्ठ विचारक माने जाते है I

डाक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को उनके इन्ही गुणों के कारण वर्ष 1954 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान “भारत रत्न” से सम्मानित किया गया था I ज्ञात हो कि राजनीति में आने से पूर्व उन्होंने अपने जीवन के तक़रीबन 40 वर्ष इस देश के बच्चों को शिक्षा दी थी I

अपने जीवन के आखिरी चरण में भी इस महान देशभक्त ने देश और सामाज की सेवा करते हुए भी, देश के सबसे अधिक उच्च पदों पर रहते हुए भी एक शिक्षक ही बने रहे और इन्होने अपना पूरा जीवन शिक्षा देने में ही बिता दिया I

डाक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन इस सम्पूर्ण विश्व को एक विद्यालय की ही तरह से देखते थे I उनके अनुसार शिक्षा के द्वारा ही मनुष्य के मस्तिष्क का सदुपयोग किया जाना संभव है I इसीलिए समस्त विश्व को एक ही इकाई समझकर शिक्षा का प्रबंध किया जाना चाहिए I

डाक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने एक बार ब्रिटेन के एडिनबरा विश्वविद्यालय में भाषण देते हुए कहा था कि, “मानव की जाति एक होनी चाहिए, मानव इतिहास का सम्पूर्ण लक्ष्य मानव जाति की मुक्ति होती है I लेकिन यह तभी संभव है जब समस्त देशों की नीतियों का आधार विश्व-शांति की स्थापना का प्रयत्न करना हो I

एक अन्य कथन में डाक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने कहा था कि, “यदि सही तरीके से शिक्षा दी जाय तो समाज की अनेकों बुराइयों को जड़ से मिटाया जा सकता है I

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डाक्टर राधाकृष्णन के अनुसार, “मात्र जानकारियाँ देना शिक्षा नहीं है I यदयपि जानकारी का अपना महत्त्व है और आधुनिक युग में तकनीक की जानकारी महत्त्वपूर्ण भी है तथापि व्यक्ति के बौद्धिक झुकाव और उसकी लोकतान्त्रिक भावना का भी बड़ा महत्त्व है I ये बातें व्यक्ति को एक उत्तरदायी नागरिक बनती है I शिक्षा का लक्ष्य है ज्ञान के प्रति समर्पण की भावना और निरंतर सीखते रहने की प्रवृत्ति I यह एक ऐसी प्रक्रिया है जो ब्यक्ति को ज्ञान और कौशल दोनों प्रदान करती है तथा इनका जीवन में उपयोग करने का मार्ग प्रशस्त करती है I करुना, प्रेम और श्रेष्ठ परम्पराओं का विकास भी शिक्षा के उद्देश्य हैं I

डाक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन जब 1962 में देश के दूसरे राष्ट्रपति बने उस समय उनके कार्यकाल के दौरान ही कुछ लोग उनसे मिलने के लिए आये और उन्होंने इस बात की इच्छा जाहिर की कि वह चाहते है कि वह सभी उनके जन्म दिवस (5 सितंबर) को शिक्षक दिवस के रूप में मनायें I इस डाक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने कहा कि अगर आप सभी ऐसा कर रहे तो मैं अपने आपको बहुत अधिक गौरान्वित महशूस कर रहा हूँ I

और तब से लेकर आज तक पूरे भारत वर्ष में 5 सितंबर को राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है I

पिछले दो वर्षों से जब से केंद्र में NDA गठबंधन की सरकार आई है तब से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने बहुत ही बढ़-चढ़कर इस कार्यक्रम को मनाने का प्रयास किया है I इस अवसर पर प्रधानमंत्री स्वयं बच्चों के बीच दिल्ली में पहुंचकर उनकी बातें सुनते है अपनी कहते है और साथ ही वीडियो कान्फ्रेंस के जरिये वह देश के दूर-दराज के इलाकों के स्कूलों और विद्यार्थियों से भी बात करतें है I उन्हें बाधाई देते हैं I

 

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