आखिर डायट छोड़कर अपने मूल विद्यालय में क्यों नहीं जाना चाहते हैं शिक्षक

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प्रतापगढ़ ब्यूरो : परिषदीय प्राथमिक शिक्षक अपने मूल विद्यालय से आखिर में नाता तोड़कर डायट में जमे रहना चाहते हैं आखिर क्यों ? अपनी आत्मा पर हाँथ रखकर सोचें कि आखिर में काम कहीं और वेतन कहीं से और क्या यह उचित है ?

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा संबद्धिकरण निरस्त किया जाना उचित है। डायट में सम्बद्ध प्राथमिक शिक्षक वास्तव में डायट में ही अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं, तो नैतिकता यह कहती की अपने पद से त्याग पत्र देकर कम्पटीशन से डायट ही चुन ले।

फ़िलहाल जो मलाई डायट में मिल रही है वह मलाई प्राथमिक स्कूलों में नहीं मिलेगी। डायट में रहकर जिस तरह से फ्रॉड कर अपने पाल्यों को शिक्षक बना बैठे हैं वह कहीं न कहीं से उनके गले की फांस जरूर बन सकती है।
फर्जी विकलांगता की आड़ पर शिक्षक बन बैठे तथाकथित डायट प्रवक्ता ऐन केन प्रकारेण अदालत के सहारे डायट में बने रहना जरूर चाहते हैं, किन्तु वे स्वयं माननीय अदालत की अवमानना कर रहे है जो अपने पाल्यों को मेडिकल बोर्ड के सामने प्रस्तुत नहीं कर रहे है। जबकि माननीय सर्वोच्च न्यायलय स्वयं प्रकरण की जाँच करा रहा है और डायट मूक दर्शक बन बैठा है।

वजह कोई और नहीं मेडिकल बोर्ड के सामने भेजने का आदेश डायट प्रशासन ही देता है ।एक यक्ष प्रश्न यह भी है की डायट प्रशासन के पास प्रशिक्षण प्राप्त सभी विकलांग जनों की सूची होने के बावजूद आखिर मेडिकल बोर्ड क्यों नहीं भेजना चाहता हैं ? प्रकरण गंभीर है इस सरकार में कोई नहीं बचेगा | फ़िलहाल प्रकरण माननीय मुख्यमंत्री के समक्ष रखकर डायट में बीते पांच वर्षो की जांच कराई जायेगी आवश्यकता पड़ी तो अदालत का दरवाजा भी खटखटाया जायेगा आखिर डायट में जमे शिक्षक अपने मूल विद्यालय क्यों नहीं जाना चाहते ?

रिपोर्ट – अवनीश कुमार मिश्र

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