कसौटी पर योगी का सियासी योग

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गोरखपुर (ब्यूरो) : गोरखपुर जिले के गोरखपीठ के अधिपति और गोरखपुर लोकसभा सीट से लागातार पांच बार से सांसद योगी आदित्यनाथ का सियासी योग एक बार फिर कसौटी पर होगा यहा से भाजपा को मिलने वाली सफलता मोदी के साथ योगी की लोकप्रियता का भी लिटमस टेस्ट होगी, कारण भाजपा ने यहां नौ मे से चार सीटों पर प्रत्याशी योगी की पसंद से तय किये है|

कम से कम इन प्रत्याशियों के साथ योगी की प्रतिष्ठा सीधे तौर पर जुड़ी है| यू तो योगी आदित्यनाथ 1998 से लोक सभा के सदस्य है लेकिन विधानसभा चुनावों मे उनकी हस्तक्षेपीय दिलतस्पी 2002 के चुनाव से देखी जा रही है| 2002 के चुनाव मे भाजपा के टिकट वितरण से नाराज योगी आदित्यनाथ ने पार्टी का सांसद होने के बावजूद डा.राधामोहन दास अग्रवाल को हिन्दू महा सभा का प्रत्याशी बनवाया और उनके चुनाव अभियान की कमान संभालते हुए जीत भी दिलवायी थी |

पहले बर्ष 2012 और फिर 2017 के चुनाव मे योगी आदित्यनाथ ने टिकट की लिस्ट को प्रतिष्ठा का मुद्दा नही बनाया लेकिन लिस्ट को देखकर आंकलन करने वाले यह मानते है कि लिस्ट मे योगी की पसन्द का पूरा ध्यान रखा गया है |

उनके प्रचार मे यह नारा”योगीजी की क्या पहचान, राधामोहन-कमल निशान” काफी सियासी बाते कह जाता है| इन सबके बीच कहीं न कहीं योगी फैक्टर भी चुनाव की कसौटी पर होगा |

रिपोर्ट-जयप्रकाश यादव

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