अभिलेखों में हेरा फेरी कर करोड़ों की जमीन हथियाने का मामला हुआ उजागर,डीएम ने दिए जांच के निर्देश

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रायबरेली : शहर की बेशकीमती जमीनों को हड़पने का एक खेल शहर कोतवाली में जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक के सामने समाधान दिवस में उजागर हुआ है दूसरे की भूमि को कैसे फ्राड करके अपनों को दिलाने के लिए बड़े पैमाने पर तहसील स्तर से लेकर कलेक्ट्रेट के भू अभिलेख में हेराफेरी करने का मामला सामने आया है।

शनिवार को गोरा बाजार निवासी अफ्फान पुत्र सुलेमान ने एक प्रार्थना पत्र जिला अधिकारी के नाम दिया था। जिस पर आज शहर कोतवाली में उसका समाधान दिवस में जिलाधिकारी के सामने सुनवाई की गई। पीड़ित अफ्फान ने जिलाधिकारी को बताया कि उसकी भूमिधरी जमीन को हड़पने के लिए तहसील के कर्मचारियों और कलेक्ट्रेट के भूलेख मुआफिस खाना के कर्मचारियों ने अभिलेखों में चिप्पड़ चिपकाकर दूसरे के नाम अंकित करवा दी थी। जिसका वाद न्यायायल तहसीलदार के यहाँ चला।जांच के बाद अभिलेखों में चिप्पड़ चिपकवाने का भृष्ट खेल उजागर हुआ। उक्त आदेश भी तहसीलदार ने अपने आदेश में दर्शाया भी हैं। फ्राड करके जिनके नाम जमीन दर्ज की गई थी उसको बेदखल तो कर दिया गया हैं। पर जिन कर्मचारियों ने सरकारी अधिलेखो में हेराफेरी की उनपर अभी तज कोई कार्यवाही नही की गई। उलटे पीड़ित अफ्फान को ही अपनी भूमिधरी जमीन में निर्माण करवाये जाने में विपक्षी द्वारा अड़चन पहुचाई जा रही थी।पीड़ित की पूरी बात और अभिलेखों की जांच के बाद जिलाधिकारी ने अफ्फान को तुरंत न्याय दिला दिया। वही फ्राड करने वालो की जांच करवाने का भी निर्देश मातहतो को दिया।

सूत्रों की माने तो सदर तहसील से लेकर कलेक्ट्रेट के भूअभिलेख कक्ष में बैठे कर्मचारी अभिलेखों में पहले हेराफेरी करते है उसके बाद संशोधन का वाद सम्बंधित न्यायालय में दायर करते हैं।इसी की आड़ में खतौनी भी हासिल कर लेते हैं यही नही अधिकारियों को गुमराह करके भ्रस्टाचार की खुराक खिलाकर कब्जा तक भी करने में सफल हो जाते है । पीड़ित अपनी दावेदारी करता रहता हैं औऱ न्याय के लिए दर दर भटकता भी हैं।इसी तरह के शहर में कई मामले हुए हैं। इनमे मुख्य रूप से राजस्व ग्राम चक बहादुरपुर गाटा संख्या 1472 बीघा 1 बिस्वा भूमि राजस्व लेखपाल और भू माफियाओं की मिलीभगत से अन्य गाटा संख्या डालकर बैनामा कर दी गई इसी तरह गाटा संख्या 7 व उसके आसपास नजूल भूमि पर भू माफियाओं ने कब्जा करके बाउंड्री वाल खड़ी कर ली हैl उसकी बेचने की जुगत में दलाल सक्रिय हैं इस तरह से करोड़ों रुपए की सरकारी जमीन भू माफियाओं ने बेच डाली हैl राजस्व ग्राम अख्तियारपुर में गाटा संख्या 148 नजूल व 62, 63, 64, 67 यह सभी जमीने प्रांतीय सरकार के अधीन नजूल भूमि है, जिसे भू माफियाओं ने दलालों के माध्यम से कच्ची लिखा पढ़ी कर कर बेच डाला यही नहीं अख्तियारपुर में इन जमीनों पर तत्कालीन डीएम अमित गुप्ता के द्वारा एक बड़ी कार्रवाई के संकेत दिए गए थे, अवैध रूप से इस जमीन पर बने भवनों पर वशीकरण के लाल निशान भी लग गए थे लेकिन ऐन वक्त पर तत्कालीन डीएम के स्थानांतरण के बाद तहसील प्रशासन ने इस पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया आज भी भू माफियाओं पर कार्रवाई के लिए जिले के बुद्धिजीवी अपेक्षाकृत हैं आपेक्षित एक जिनमे जांच भी चल रही हैं।अफ्फान के मामले में पता चला हैं कि गोराबाजार का एक भूमाफिया जो जेल में बंद है सब कुछ उसी के इशारे पर हुआ था।

रिपोर्ट – प्रशांत त्रिपाठी 

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