इंसेफेलाइटिस पीड़ितों की दशा “उम्मीद ए शिफा भी नहीं बीमार को अब तो”

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गोरखपुर(ब्यूरो)- इंसेफेलाइटिस से पीड़ित बच्चो की हालत ऐसी है कि देखकर रूंह कांप जाय| कोई मानसिक रूप से विकलांग हो गया है तो कोई शारीरिक रूप से, कई तो ऐसे हैं जैसे जीवित शव बन गये है| उनकी हालत मे सुधार संभव नही है क्योकि वे राजस्थान ही नही मेदांता तक से वापस लौट चुके है| उनके सामने पहाड़ जैसी जिन्दगी पड़ी है वह कैसे कटेगी? शिविरो मे तो वे आते तो है लेकिन उन्हे उम्मीद भी नजर नहीं आती|

बीआरडी मेडिकल कालेज के परिसर मे इंसेफेलाइटिस विकलांग चिकित्सा शिविर मे वेवशी के ऐसे दृश्य देखने को मिले कि रोगटे खड़े हो गये| लाचारी का आलम ये था कि बीमारी से विकलांग हुए बच्चे न चल सकते है और न ही बोल पा रहे है| उनके हाव-भाव और मनोदशा से सिर्फ और सिर्फ लाचारी ही झलक रही थी| उनके माता-पिता उनको कंधे पर उठाए शिविर मे पहुंचे थे उन्हे उम्मीद थी कि डाक्टर उनके बच्चो के लिए कुछ ना कुछ जरूर करेंगे, कुछ आर्थिक मदद मिलेगी लेकिन ऐसा नही हुआ|

मेडिकल बोर्ड के विलंब से पहुंचे डाक्टर-

मेडिकल बोर्ड मे बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण कर रिपोर्ट देने वाले दो डाक्टरो मे से एक विलंब से पहुंचे पूछने पर यह पता चला कि दोनो डाक्टर राजन शाही एंव पी गोविन्द प्रसाद रात के समय ड्यूटी करने के बावजूद शिविर में उनकी ड्यूटी दी गई थी|

रिपोर्ट- जयप्रकाश यादव

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