लोकसभा में अभिषेक सिंह की आवाज गूंजी, ग्रामीण क्षेत्रों में एसबीआई की शाखाएं खोलने की मांग

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राजनांदगांव/छत्तीसगढ़(राज्य ब्यूरो)- सांसद अभिषेक सिंह ने आज लोकसभा में स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया से पांच बैंको को विलय करने संबंधित विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि इस विधेयक के तहत जिन पांच बैंको का स्टेट बैंक में विलय हुआ है इससे जनता को फायदा होगा l उन्होंने कहा कि यदि इन बैंको के विलय के महत्व को समझना है तो एसबीआई के इतिहास को जानना आवश्यक है l

सांसद सिंह ने कहा कि स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की शुरूआत सन 1806 में बैंक ऑफ़ कोलकाता के नाम हुई थी, बाद में इसका नाम बदलकर बैंक ऑफ़ बंगाल रखा गया l सन 1921 में दो अन्य प्रेसीडेंसी बैंकों के जुड़ने के बाद इम्पीरियल बैंक की स्थापना हुई l सन 1955 में आजादी के बाद इंपीरियल बैंक का नामान्तरण स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के नाम से हुआ l यह बैंक आजादी के पूर्व से लेकर आजादी के बाद तक भारत के अर्थव्यवस्था का न केवल साक्षी रहा है, बल्कि एक महत्वपूर्ण भूमिका भी इसने निभाई है l आजादी से पहले अधिकांश राज्यों में प्रिंसली स्टेट बैंक मौजूद थे l आज़ादी के बाद इन बैंको को भारतीय बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने पर विचार हुआ l इसे मर्ज न कर उसे सब्सीडरी बैंक के रूप में स्थापित करने का निर्णय लिया गया l सन 1959 में संसद में बिल पास हुआ l सन 2008 में स्टेट बैंक ऑफ़ सौराष्ट्र एवं सन 2010 में स्टेट बैंक ऑफ़ इंदौर का एसबीआई में विलय हुआ lसन 2017 में पांच बैंकों का विलय हुआ l

श्री सिंह ने कहा कि एसबीआई से पांच बैंकों के विलय होने से इसका सबसे ज्यादा फायदा इस देश की जनता को होने वाला है l उसे एक बड़े बैंक से कम ब्याज पर ऋण मिलने की संभावना बढ़ जाएगी l उन्होंने कहा कि इस देश एवं दुनिया के परिदृश्य में बैंकिंग सिस्टम में तेजी से बदलाव आते जा रहा है l आने वाला समय डिजीटल बैंकिंग की ओर इशारा कर रहा है लेकिन इसके बावजूद वे जिस राज्य से आते हैं उसका बड़ा हिस्सा आदिवासी बहुल और नक्सल प्रभावित है l आज भी कुछ गाँव ऐसे हैं जहाँ के लोगों को बैंक से संबंधित कार्य के लिए 30 से 40 किमी जाना पड़ता है l उन्होंने अनुरोध किया कि ऐसे गाँव में एसबीआई की शाखाएं खोली जायें ताकि ग्रामीणों को बैंकिंग सुविधा का लाभ मिल सके ।

रिपोर्ट- महेंद्र शर्मा/हरदीप छाबड़ा

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