प्रशासन की अनदेखी से फल फूल रहा नशे का कारोबार

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सहार(औरैया)-2018 तक शराब के ठेके बाट चुकी पूर्ववर्ती अखिलेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हाईवे से सटे 8,000 ठेकों को रिहायसी बस्तियों में स्थानांतरित करने के लिए फैसले को योगी सरकार उलटने के मूड में है क्योकि योगी सरकार का शराब व शराब माफियाओं के प्रति जहां बहुत ही कडा रुख देखने को मिल रहा है वही औरैया जनपद के कस्बा सहार की कमोबेश हालत ये है कि सरकारी आदेशो के चलते पुरानी शराब की दुकानें बंद हो गयी| वही नई दुकाने समाज के विरोध को देखकर बन्द है लेकिन इन सबके बावजूद शराब की बिक्री चरम पर है। अंतर इतना है जो शराब का पौव्वा 70 का था अब 80 रुपये में जानकर व्यक्ति को आसानी से उपलब्ध है।

आबकारी विभाग और प्रशासन की लापरवाही के चलते शराबियों व शराब माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। आबकारी विभाग आंख मूंदकर यह तमाशा देख रहा है। एक ओर औरैया की बदनाम परछाइयां बस्ती और गांवों में जहां पर शराब की अवैध भट्ठियां बरसों से चल रही है और शराब बनाई जा रही है शराब बनाने वाले खुलकर शराबियों को शराब बेच रहे है और शाम होते-होते यहां शराबियों का जमघट लग जाता है और दूसरे एक दूसरे को भद्दी भद्दी गालियां देकर गली के बाहर निकलते हैं और यहां से चंद कदम की दूरी पर सहार की पुलिस चौकी है। फिर भी शराबियो और चोरी से शराब बेचने वालों को इस बात का जरा भी भय नही है। नगर के कई बुद्धिजीवियो ने कहां कि शराब की लत से शराबी मान मर्यादा भूल जाता है| उत्तर प्रदेश में आदित्यनाथ योगी ने एंट्री रोमियो स्क्वायड बनाकर लड़कियों से होने वाले दुर्व्यवहार का तो इलाज कर दिया है लेकिन जो शराबी और नशेड़ी पति व पुत्र परिवारों पर अत्याचार करते हैं उन पर भी नकेल कसी जानी चाहिए| उन्होंने कहा कि नशे के आदी लोग महिलाओं की मेहनत की कमाई भी छीन कर शराब के नशे में उड़ा देते हैं| उन महिलाओं और परिवारो को बचाने के लिए जरूरी है कि उत्तर प्रदेश सरकार जिस तरह बूचड़खाने बंद करने का प्रयास कर रही है वैसे ही नशे पर भी पाबंदी लगा देनी चाहिये अभी अभी जो राष्ट्रीय राजमार्गों पर शराब का असर कम करने के लिए कुछ सड़कों पर ही पाबंदी लगाई गई है। कस्बावासियों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि ऐसे अवैध शराब खानों के सप्लाई करने वालो के खिलाफ जल्द करवाई करे।और उनकीआवाज को सुनेतथा उन्हें नशेड़ियों के शोषण से बचाएं। जिससे कि सामाजिक उत्थान हो सके और अमन चैन कायम रहा सके।

रिपोर्ट- मनोज कुमार सविता 

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