खाद्य अधिकारी की कार्यशैली आई विवादों के घेरे में, उच्चाधिकारी मौन 

उरई/जालौन(ब्यूरो)- योगी राज में जिले में किस तरह का रामराज  चल रहा है, इसकी बानगी इन दिनों खाद्य विभाग में देखने को मिल रही है। बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थ शुद्ध व गुणवत्तायुक्त है या नहीं, यह सुनिश्चित करने वाला खाद्य विभाग इन दिनों लोगों की सेहत का सौदा कर रहा है। यही वजह है कि शहर में बडे पैमाने पर अवैध गुटखा का कारोबार हो रहा है और बाजार में गुटखा के नाम पर लोगों को धीमा जहर बेचा जा रहा है। यह सब कुछ खाद्य विभाग चुपचाप देख रहा है। कार्रवाई के नाम पर औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। इसके चलते खाद्य अधिकारी तक की कार्यशैली विवादों के घेरे में आ गई है।

प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद भाजपाइयों द्वारा यह ऐलान किया जा रहा था कि योगीराज में सभी अवैध कारोबार बंद हो जाएंगे और इन कारोबारों में शामिल लोगों की जगह जेल की सलाखों के अंदर होगी, पर यह सब हवा-हवाई साबित हुआ है। आलम यह है कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद शहर में अवैध गुटखा का कारोबार अपने चरम पर पहुंच गया है। शहर के करीब आधा दर्जन मोहल्ले तेा अवैध गुटखा कारोबार के  लिए ही विख्यात हो चुके हैं। इनमें तुलसी नगर, गांधी नगर, रामनगर, झांसी रोड सबसे प्रमुख हैं।

खास बात यह है कि अवैध गुटखा के नाम पर लोगों को धीमा जहर बेचा जा रहा है। जो गुटखा बनाया जा रहा है उसमें घटिया स्तर का कत्था से लेकर घटिया तंबाकू, सुपाडी तक प्रयोग की जा रही है, जो कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी को न्यौता देने के लिए काफी है। इस तरह से खुलेआम लोगों को जहर की पुडिया बेची जा रही है और खाद्य विभाग इस पर कार्रवाई करने के बजाए खुद अपना संरक्षण दिए हुए है या यूं कहें कि खाद्य विभाग भी लोगों की जान का सौदा किए बैठा है। जिसके चलते विभागीय अधिकारी गुटखा माफियाओं पर कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। इतने बडे स्तर पर सब कुछ खुलेआम होने के बाद भी खाद्य विभाग द्वारा कार्रवाई की हिम्मत न जुटा पाना कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे रहा है। इसके चलते खाद्य अधिकारी की कार्यशैली पर भी सवालिया निशान लगने लगे हैं कि आखिर क्या वजह है कि उन्होंने अचानक इस अवैध कारोबार पर अपनी चुप्पी साध ली? वहीं उच्च अधिकारी भी इस मामले को लेकर अभी तक गंभीर नहीं हुए हैं। जिसके चलते लोगों की जान से खिलवाड जारी है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार-
शहर में फैले अवैध गुटखा कारोबार को लेकर जब खाद्य अधिकारी प्रियंका सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वह इस संबंध में फोन पर कुछ नहीं कहेगीं। कार्यालय आकर इस संबंध में बात कीजिए। खाद्य अधिकारी के इस बेतुके बयान के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर क्या वजह है कि गुटखा माफियाओं के बारे में वह फोन पर बात नहीं कर पा रही हैं?

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