दोपहर १२ बजे तक खाली रहते हैं जिले के सरकारी अस्पताल

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प्रतापगढ़(ब्यूरो)- उत्तर प्रदेश में सरकार बदली है और एक उम्मीद थी की सुशासन के नाम पर सत्ता में आई सरकार के आने से विभागों के आल अधिकारी सक्रीय होंगे लेकिन लगता है कि अपने रवैये में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इतने मशगूल हैं की इन्हें सरकार बदलने की भनक ही नहीं लगी है | जी हाँ, ऐसा ही है कुछ हाल प्रतापगढ़ के अस्पतालों का !
सूबे की सरकार बदले हुए हालाँकि कुछ दिन ही हुए हैं लेकिन योगी सरकार ने कई विभागों को सक्रीय कर दिया है लेकिन शायद अभी तक उनका ध्यान स्वास्थ्य विभाग की तरफ नहीं गया है तभी तो जिले के सभी स्वास्थ्य कर्मचारी मध्य दोपहर तक भी अपने केबिन से नदारद रहे |

जब अखंड भारत के पत्रकारों द्वारा इस घटना की शिकायत उच्च अधिकारीयों के द्वारा की गयी तो उन्होंने देखते हैं कह के मामले को टाल दिया| यहाँ सबसे बड़ा सवाल यह है की जब सरकार इन लोगों पर इतना खर्च करती है तो इनकी भी तो कुछ जिम्मेदारी बनती है लेकिन यहाँ सब उल्टा है अस्पताल के डॉक्टर अपने सहायकों को ड्यूटी पर लगा कर निजी प्रैक्टिस करते हैं और मज़बूरन लोगों को झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाना पड़ता है |

हाल ही में हुई एक घटना से स्वास्थ्य विभाग में हो रही धांधलियों का पता चलता है | जिले के मान्धाता क्षेत्र में हुई एक फायरिंग में घायल हुए एक मरीज़ को जब अस्पताल ले जाया गया तो पता चला की अस्पताल में कोई डॉक्टर मौज़ूद ही नहीं है | घायल स्थिति में मरीज को कहाँ ले जाया जाए ?

जिले के सुप्रीटेन्डेन्ट अपने सहायक को ड्यूटी पर लगा कर अपनी निजी प्रैक्टिस करते हैं| हमारे पास इस बात का सबूत भी है और आवश्यकता पड़ने पर ये पेश भी किये जायेंगे | समस्या है सुनने वालों की जिन्हें सबूत की जरूरत हो सकती है वे तो खुद सो रहे हैं| इस घटना में हालाँकि पुलिस व्यवस्था मज़बूत रही है और इसके लिए वो धन्यवाद के पात्र हैं |

रिपोर्ट- अवनीश कुमार मिश्रा
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