योगी के आने के बाद भी सपा सरकार के रंग में रंगे हैं अधिकारी

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सुल्तानपुर(ब्यूरो)- सूबे में भले ही कहने के लिए योगी राज आ गया है लेकिन कुछ पुलिस अधिकारी अब भी सपा राज के ही नक्शा कदम पर चल रहे है। ऐसे अधिकारी कमजोरों को न्याय दिलाने के बजाय प्रभावशाली पक्ष के ही सुर में सुर मिलाकर जमीन पर अवैध ढंग से कब्जा कराने व फर्जी मुकदमो में फंसाने का खेल कर रहे है। विभाग के उच्चाधिकारी भी इनका खेल या तो समझ नही पाते है या फिर इस खेल से जान-बूझकर अंजान बने हुए है।

यह मामला कोतवाली देहात के मौजूदा थानाध्यक्ष नन्द कुमार तिवारी से जुड़ा हुआ है। जिन पर पीड़ित विकलांग देवव्रत तिवारी निवासी अभियाकला ने मुख्यमंत्री व डीजीपी समेत अन्य को पत्र भेजकर गम्भीर आरोप लगाए है। देवव्रत तिवारी के आरोप के मुताबिक उसके गाँव के ही राजेश तिवारी, प्रदीप तिवारी व इनके समर्थक अशोक तिवारी, संजय पाठक, चन्दन पाठक(जादीपुर) आदि की नाजायज गोल है, जो कि आपराधिक प्रवृत्ति के लोग हैं। जो आये दिन जान से मारने की धमकी आदि देते रहते है।

देवव्रत के मुताबिक उसके भाई आशुतोष ने इसी बात का विरोध किया तो राजेश आदि के प्रभाव में पुलिस ने आशुतोष पर ही दबाव बनाने के लिए एक फर्जी मुकदमा दर्ज कर दिया। देवव्रत ने जब थानाध्यक्ष से मिलकर सही बात बताई और निष्पक्ष विवेचना कराकर फर्जी मुकदमें से भाई का नाम हटाने की मांग की तो थानाध्यक्ष ने लम्बी रकम की मांग की लेकिन अपनी आर्थिक असमर्थता के कारण देवव्रत ने इतनी बड़ी रकम देने से इंकार कर दिया तो थानाध्यक्ष ने उसे भी फर्जी केस में फंसाने की ठान ली।इस प्रकरण की शिकायत जब देवव्रत ने प्रदेश स्तरीय अधिकारियो से की तो जानकारी मिलने पर थानाध्यक्ष को यह बात नगवांर गुजरी। जिसके बाद उन्होंने एक विकलांग व्यक्ति पर ही अपनी वर्दी का रौब झाड़ते हुए कह दिया कि चाहे जितने ऊपर तक शिकायत करो, लेकिन बाद में उसका निस्तारण उन्हें ही करना है और उससे उनकी कुछ उखड़ने वाली नही है।

पुलिस का यह अंदाज देखने से साफ जाहिर है कि भले ही कहने मात्र के लिए योगीराज में क़ानून का राज है, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। सच तो यह है कि ऐसे पुलिस अधिकारी हमेशा ही प्रभावशाली व पैसे वालो का ही काम करते है और अपने उच्चाधिकारियों को भी उल्टी सीधी रिपोर्ट देकर उन्हें गुमराह करने में भी सफल हो जाते है, नतीजतन उच्चाधिकारी उन पर कार्यवाही के बजाय विभाग की शाख बचाने के लिए उन्हें पद पर बनाये रखने के लिए संरक्षण भी देने लगते है। खैर थानाध्यक्ष नन्द कुमार तिवारी का यह पहला खेल नही है, इसके पहले भी वे मझवारा के अजीत हत्याकांड की विवेचना में खेल के चलते चर्चा में आ चुके है, जिस कारण उनसे मामले की तफ्तीश भी छीन ली गई थी।इसके अलावा क्षेत्र में क़ानून को तोड़-मरोड़कर भू-माफियाओं को संरक्षण देकर जमीन पर कब्जा कराने का भी खेल बड़े स्तर पर जारी है। ऐसे में योगीराज में भी सपाराज के ढर्रे पर चलने वाले पुलिस अधिकारी पर उच्चाधिकारियों व जिले के प्रतिनिधियों की नज़र कब पड़ेगी, यह अहम सवाल बना हुआ है।

रिपोर्ट- दीपक मिश्रा 

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