नरेन्द्र मोदी के दौरे का असर, श्रीलंका ने चीन को पनडुब्बी रखने की अपील को किया ख़ारिज

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नरेंद्र मोदी दो दिन के दौरे पर श्रीलंका आये हुए हैं और इस दौरान ही वहां की सरकार ने चीन द्वारा कोलम्बो के एक बंदरगाह पर पनडुब्बी रखने की अपील को नामंज़ूर करते हुए एक बयान ज़ारी किया है| श्रीलंका के एक सरकारी अफसर ने बताया कि श्रीलंका किसी भी समय चीन की पनडुब्बी रखने की अपील से सहमत नहीं था और इस सम्बन्ध में उसने भारत की चिंताओं का भी ज़िक्र किया था |

जी हाँ, आपको बता दें कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दो साल के भीतर यह श्रीलंका की दूसरी यात्रा है और इस दौरान उन्होंने वहां कई संबोधन भी दिए हैं| दोनों देशों के बीच संबंधों को मधुर बनाने की कवायद ज़ारी है और इसी का नतीजा है कि चीन की समुद्री सीमाओं पर नियंत्रण की आशाओं पर पानी फिर गया | श्रीलंका की दूसरी यात्रा पर गए पीएम नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को अंतरराष्‍ट्रीय वेसक दिवस समारोह के अवसर पर यह भी घोषणा की कि ज़ल्द ही वाराणसी और कोलम्बो के बीच सीधी फ्लाइट शुरू की जाएगी |

इससे पहले चीन को मिल चुकी थी इज़ाज़त-
आपको यह भी बता दें कि श्रीलंका ने इससे पूर्व सन २०१४ में चीन को पनडुब्बी रखने की इज़ाज़त दे दी थी हालाँकि उस समय भी भारत ने इसका विरोध किया था लेकिन संबंधों में कटुता के चलते इसका कोई असर नहीं हुआ था| वहीं एक बार फिर नरेन्द्र मोदी ने अपनी विदेश नीति के झंडे गाड़ दिए और साबित कर दिया कि हिंदुस्तान और श्रीलंका के बीच की दोस्ती सदियों पुरानी है और ये सम्बन्ध सदैव कायम रहेंगे|

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