प्रशासन की चाभी रहे अधिकारी, ईमानदार जनप्रतिनिधियों के पास

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आपकी बात – आज मैं इस भीषण गर्मी में जबकि हर जगह सूर्यदेव की तपन से त्राहिमाम्-त्राहिमाम् मची हुई थी, तब मैं अपने कार्यालय में बैठा हुआ कूलर की ठंड़ी-ठंडी हवा में सोच रहा था कि आज हम सुविधा भोगी पत्रकार एयर कान्डीशन में बैठकर गरीब जनता की समस्याओं को लिखने का कैसा ढोंग कर रहे है। आम आदमी आज भी अपनी समस्याओं से परेशान दु:खी है। अस्पतालों की आलीसान विल्डिंगे तो बनी हुई लेकिन इन अस्पतालों में न दवायें न आधुनिक कोई सुविधायें है। जनता मीटर लगाने के लिये तथा खराब मीटर बदलाने के लिये कितने चक्कर लगाते है मगर विजली विभाग द्वारा न मीटर लगाये जा रहे है और मीटर बदले जा रहे है। करोड़ों रूपया खर्च करके विजली चोरी के अभियान तो युद्ध स्तर पर चलाये जा रहे है। शिक्षा संस्थान आज भी सुविधाओं से वंचित है लेकिन देश को शिक्षित करने की बाते कही जा रही है। मैं यह सब सोच ही रहा था कि अचानक मेरे टेलीफोन की घंटी घनघना उठी मैंने रिसीवर उठाकर हैलो-हैलों कर के पूछा तो दूसरी तफर से गुरूदेव नारद जी की जानी पहचानी आवाज आई।

मैंने गुरूदेव को प्रणाम करते हुये टेलीफोन पर उनसे कहा- गुरूदेव आप कब आ रहे है आप के आदेश पर व्यंग चैपाल शुरू कर दी गई है। आप के आने पर ही यह व्यंग चैपाल जनता के हितों में अच्छी तरह से चल सकेगी। गुरूदेव मेरी बात पर बड़ी जोर से हंसे और बोले बच्चू! अभी तुम्हारे उत्तर प्रदेश में शासन तो बदल गया है लेकिन प्रशासन नहीं बदल पाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पकड़ प्रशासन पर मजबूत नहीं हो पाई है। प्रशासन द्वारा लगाई जा रहे जन समस्या मेला, तहसील दिवस, थाना दिवस, किसान दिवस केवल अखवारों के समाचार तक ही सीमित होकर रह गये है। इन दिवसों में जन समस्याओं को लेकर लोग आते है बरिष्ठ अधिकारी इन समस्याओं को सुनकर उन पर आदेश भी कर देते है लेकिन नीचे स्तर के कर्मचारी अपनी मर्जी के अनुसार ही इन समस्याओं को देखते है और उन पर कार्यवाही करते है। तो बच्चू! तुम्हारी इस व्यंग चैपाल को कौन अधिकारी पढेगा और कौन इन पर कार्यवाही करेगा।

गुरूदेव की बातों को सुनकर मैंने कहा- गुरूदेव आप अंतरयामी है, घट-घट की सभी बाते जानते है। शासन के बदलने के बाद भी हकीकत में यही सव कुछ हो रहा है। इन चैपालों में आई हुई जन समस्या शिकायतों को बदले हुये अधिकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रीति नीति से देखकर हर समस्या को गम्भीरता से लेते है आदेश भी करते है लेकिन पुराने ढर्रे पर चलने वाले अधिकारी कर्मचारी अपनी मर्जी से ही अपना काम कर रहे है। अगर कोई शिकायत करता है तो उसके काम में कोई लकूना निकाल कर बरिष्ठ अधिकारी को गुमराह कर दिया जाता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने प्रशासन कार्य में राजनैतिक हस्तक्षेप रोक दिया है। अब न तो विधायकों की चलती है और न ही सांसदों की चलती है। यहां तक अगर भाजपा के विधायक, सांसद उनके अध्यक्ष अगर किसी अधिकारी से कहते है तो उनकी बात पर कोई ध्यान न देकर वरिष्ठ अधिकारी अपने अधीनस्थों की गई कार्यवाही की ही पुष्टि करते है।

मेरी बात को सुनकर गुरूदेव नारद जी बोले- बच्चू! मैं तुम्हारी कहीं हुई बातों को मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ जी के सामने रखूगा और उनसे कहूगा कि लोकतंत्र में व्यवस्था की चावी केवल अधिकारियों के पास ही न रहे यह चावी ईमानदार, कर्मठ जन प्रतिनिधियों के पास भी रहनी चाहिए जिससे प्रशासन कुशलता से चले। मैं कुछ कहता इसके पहले ही गुरूदेव ने रिसीवर रख दिया और जो कहना चाहता था वह मैं न कह सका।

लेखन- दीपक शर्मा

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