जो कल तक देता था रोशनी, वहीं आज अधेरे में खो गया

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रसड़ा(बलिया)। भारतीय लोकतंत्र में सत्ता का सुख भोगने वाले जनप्रतिनिधियों के द्रारा लोकहित मे स्थापित कल कारखानो योजनाओ के प्रति ध्यान न दिये जाने के कारण औधोगिक उपक्रम जंहा बन्द है वही इनको चालू करने को लेकर कोई वर्षो से किसी ठोस योजना न बनने से किसानों मे भारी रोष व्याप्त है। इस प्रकार की लापरवाही का नाजारा देखना है तो यूपी के बलिया लखनऊ नेशनल हाईवे पर रसड़ा तहसील क्षेत्र के माधोपुर मे देखा जा सकता है। जहाँ रोजगार सृजन एवं कृषक उन्नयन के लिए 1975 की दशक में स्थापित दि किसान सहकारी चीनी मिल रसड़ा को सरकार द्रारा घाटा दिखाकर बंन्द कर दिया गया जिसके कारण कभी हमेशा 65 एकड़ भूमि पर गुलजार रहने वाली चीनी मिल परिसर में अजीब मौत का सन्नाटा कायम हो गया है। यहा आने पर यहां का कण कण मानो यही कहता है कि ऐ लोकतंत्र के ठेकेदारो हमारे भी अच्छे दिन व नया जीवन दो ताकि मै हजारों किसानो के तरक्की और हजारो श्रमिको के रोजी रोटी का साधन बन सकू ।

बताते चलें स्व प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी जी ने 1975के दशक में मिल स्थापित किया था कुछ ही वर्षों बाद इसमे घाटे में डाल दिया नेताओ व अधिकारियो की लिपापोती पूर्ण कारगुजारियो से मिल की हालत दिनपर दिन खराब हो गई जिसकी कारण सभी को खुशी तरक्की रोजी-रोटी देने वाली यह मिल आज अपने ही बदहाली पर आसूं बहा रही है। क्योंकि इसे वर्षो से बन्द कर दिया गया है। जबकि एक एक वोट की भीख मांगने वाले राजनैतिक धुरधर नेता इस मिल को चालू करने के लिए केवल डायलागो के प्रहार के सिवा कुछ भी नहीं करते जिसमे क्षेत्र के किसानो व श्रमिको मे भारी रोष व्याप्त है ।

अतित के पन्नों में दर्ज रसड़ा गन्ना उत्पादन में अव्वल क्षेत्र रहा है किन्तु यहा चीनी मिल कि दयनीय हालातो ने किसानों को गन्ने की खेती न करने की ओर मोड दिया जिसके कारण यहां गन्ना की खेती शुन्य पर पहुच गयी है। ऐसे में किसानों का मानना है कि यदि मिल को चालू करने के दावे पर अमल भी किया गया तो सरकार को गन्ना उत्पादन को प्रोत्साहित करना होगा तथा गन्ना मूल्य भुगतान के निति भी करना होगा क्यो कि यदि ऐसा किया गया तभी रसडा चीनी मिल को नया जीवन प्राप्त हो पायेगा ।

बताते चलें कि रसडा क्षेत्र में स्थापित चिनी मिल व कताई मिल के बंद होने से व्यापारिक प्रतिष्ठान पर भी काफी प्रतिकूल असर पड़ा है यदि किसी तरह यह मिल चालू किया गया तो क्षेत्र के किसानों श्रमिको के अलावा सबका साथ सबका विकास के लिए वरदान साबित होगा । हालांकि बलिया ज़िला का राजनैतिक चर्चा लखनऊ दिल्ली के गलियारों में हमेशा गुजती रहतीं समाजवादी पार्टी, बसपा, भाजपा, तीनों पार्टियों से हमेशा जनपद के मंत्री रहे मगर दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि सभी लोग केवल वादा करते हैं फिर चुनाव बाद विकास की बात कम ट्रांसफर पोस्टिंग में लिप्त हो जातें हैं ख़ैर इस बार गठबंधन हुआ है सायद चुनाव में फिर वादा किया जायेगा।

रिपोर्ट पिन्टू सिंह

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