क्रिकेट के वर्ल्ड में अब भी हैं सबसे ख़ास कप्तान कपिल देव के वह 175 रन

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преданность друга цитаты 1983 में इंग्लैण्ड की धरती पर खेले गए तीसरे विश्वकप जिसमें भारत ने विश्वविजेता बनने का गौरव हासिल किया था उस पूरे के पूरे टूर्नामेंट को अगर आज भी कोई याद करता है तो कपिल देव की वह 175 रनों की तूफानी पारी आज भी दुनिया के सभी क्रिकेट प्रेमियों के लिए बेहद ख़ास मानी जाती हैं I और भारतीय तो जब तक क्रिकेट देखेंगे उनके लिए कपिल की यह पारी सबसे अहम् होगी I

lg 24lh451u характеристики भारत ने जब इस टूर्नामेंट में हिस्सा लिया था तो पूरी दुनिया को भारत से 1-2 मैच जीतने से ज्यादा की आशा नहीं थी लेकिन भारत ने इसके विपरीत प्रदर्शन करते हुए अपने पहले ही लीग मैच में जब पूर्व विश्व विजेता वेस्टइंडीज को हरा दिया था तब खिलाडियों के हौसले भी बढ़ गए थे और भारतीय दर्शकों की आशा भी I सभी को यह लगने लगा था कि अब भारतीय टीम कुछ न कुछ तो कर सकती है I

http://esm-group.ru/library/kommutator-zazhiganiya-svoimi-rukami.html коммутатор зажигания своими руками इस पूरे टूर्नामेंट में 8 टीमें सम्मिलित हुई थी जिन्हें 4-4 के दो ग्रुप में विभाजित किया गया था I ग्रुप ‘ए’ में न्यूज़ीलैंड, पाकिस्तान, श्रीलंका और इंग्लैंड की टीमें थीं, जबकि भारत को ग्रुप ‘बी’ में ऑस्ट्रेलिया, वेस्ट इंडीज़ और ज़िम्बाब्वे के साथ रखा गया था।

кузьмин белые дикие кони текст भारत जिसे सबसे कमजोर टीम के रूप में आँका जा रहा था उसने अपने पहले ही मैच में उसे विश्वविजेता को हराया उसके बाद दूसरे मैच में टीम इंडिया ने ज़िम्बाब्वे को भी हरा दिया था I और इन दोनों को हारने के बाद टीम का आत्मविश्वास काफी बढ़ गया था I हालाँकि टीम इंडिया को अपने तीसरे और चौथे मैंचों में क्रमशः ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज़ के हाथों हार का सामना करना पड़ा था और उसके बाद अचानक से ही भारत के लिए 18 जून को ज़िम्बाब्वे के साथ खेला जाने वाला मैच अत्यंत ही महत्त्वपूर्ण हो गया था I भारत को इसे जीतना ही था I

http://mountainpinesretreat.com/owner/gamavit-dlya-krolikov-instruktsiya.html гамавит для кроликов инструкция इस समय भारत की टीम के कप्तान कपिल देव और विकेट कीपर सैयद किरमानी के अलावा सुनील गावस्कर, कृष्णमाचारी श्रीकांत, मोहिन्दर अमरनाथ, संदीप पाटिल, यशपाल शर्मा, रोजर बिन्नी, रवि शास्त्री, मदनलाल तथा बलविन्दर संधू शामिल थे, जबकि दूसरी तरफ ज़िम्बाब्वे की टीम में कप्तान डंकन फ्लेचर और विकेटकीपर डेव हॉटन के अलावा रॉबिन ब्राउन, ग्रांट पीटरसन, जैक हेरॉन, एंडी पायक्रॉफ्ट, केविन कुर्रन, इयान बुच्चार्ट, जेराल्ड पेकोवर, पीटर रॉसन तथा जॉन ट्रायकॉस शामिल थे।

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полынь магические свойства जब भारत ने टॉस जीतकर लिया पहले बल्लेबाजी का निर्णय –

http://ventadecasasencuba.com/priority/kak-razdelit-kredit-pri-razvode-obrazets-iska.html भारत ने इस मैच में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया लेकिन यह फैसला पूरी तरह से टीम के ऊपर भारी तब पड़ने लगा जब टीम की सबसे मजबूत रीढ़ की हड्डी कहे जाने वाले सलामी बल्लेबाज सुनील गावस्कर बिना खाता खोले ही पवेलियन की तरफ लौट गए I सुनील को पगबाधा आउट किया था पीटर रॉसन ने I इसके बाद तो मानों टीम इंडिया ने उस फार्मूले को अमल में ला लिया हो कि तू चल मैं आता हूँ और उसके बाद टीम के दूसरे सलामी बल्लेबाज कृष्णमाचारी श्रीकांत भी खाता खोले बिना केविन कुर्रन की गेंद पर इयान बुच्चार्ट को कैच थमाकर पैवेलियन लौट गए। और इस समय टीम इंडिया का कुल स्कोर था 6 रनों का I
और इसके बार भारत का तीसरा विकेट भी मोहिन्दर अमरनाथ के रूप में टीम के कुल 6 रनों के स्कोर पर ही चल बसा I मोहिंदर अमरनाथ ने अभी तक 20 गेंदों में एक चौके की मदद से 5 रन बनाये थे और रॉसन ने विकेट के पीछे डेव हॉटन के हाथों में इन्हें लपकवा दिया । अब भारत की हालत बिलकुल खस्ता होती जी रही थी कि तभी अमरनाथ के लौटने के बाद जब तक टीम के खाते में तीन रन ही जुड़े थे कि तभी संदीप पाटिल भी 10 गेंदों में एक रन बनाकर कुर्रन की गेंद पर विकेटकीपर हॉटन को कैच थमा बैठे। उसके बाद 17 के कुल योग पर यशपाल शर्मा भी आउट हो गए और उन्होंने भी रॉसन की गेंद पर डेव हॉटन को कैच दिया।

अब तक मात्र 17 रनों के कुल स्कोर पर ही भारत की आधी टीम पवेलियन वापस लौट चुकी थी I और उस समय भारतीय टीम की छवि जिस तरह की थी उसके हिसाब से सभी लोग पूरी तरह से उम्मीद खो चुके थे कि अब भारत इस मैच में वापसी कर सकता है I ऐसे विपरीत समय पर भारत की तरफ से हरफनमौला कप्तान कपिलदेव ने पारी को सँभालते हुए एक ऐसी पारी खेली जो विश्वरिकॉर्ड तो भले ही सिर्फ एक साल तक ही रह पायी थी, लेकिन भारतीय क्रिकेट के प्रशंसकों के ज़हन से आज तक नहीं उतरी है I

लेकिन दुर्भाग्य की बात सबसे बड़ी यह रही कि उस पारी को देखने का सौभाग्य क्रिकेट के सबसे किस्मत वाले प्रशंसकों को ही मिल पाया था क्योंकि उस मैच का टीवी प्रसारण नहीं हो पाया था I दरअसल टूर्नामेंट का आधिकारिक ब्रॉडकास्टर बीबीसी उस दिन हड़ताल पर था जिसकी वजहसे वह मैच न प्रसारित किया गया और न ही उसे रिकॉर्ड ही किया जा सका I тапочки квадратом схема कपिल देव के द्वारा खेली गयी इस पारी का अपना अलग ही एक और सबसे बड़ा महत्त्व यह भी हैं कि यह http://association-sonar.org/library/skolko-stoit-obsledovanie-kota.html сколько стоит обследование кота किसी भी भारतीय द्वारा एक-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लगाया गया पहला शतक था।

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उस दिन मैदान में जितने भी दर्शक बैठे हुए थे उन्हें एक ऐसी पारी देखने को मिली थी जो भले ही आज के रिकॉर्ड्स के मुकाबले बहुत बड़ी न लगती हो, लेकिन समय में ऐसी पारी शायद ही किसी ने देखी होगी I कपिल देव जब बल्लेबाजी करने के लिए मैदान में उतरे थे तब तक भारत की आधी टीम पवेलियन पहुँच चुकी थी ऐसे में कपिल ने रोजर बिन्नी के साथ छठे विकेट के लिए 60 रन की और उसके बाद रवि शास्त्री के साथ सातवें विकेट के लिए 1 रन की फिर रवि के आउट होने के बाद आठवें विकेट के लिए मदनलाल के साथ 62 रन की और आखिरकार नवें विकेट के लिए विकेटकीपर सैयद किरमानी के साथ 126 रन की नाबाद साझीदारी की।

आपको बता दें कि यह साझीदारी एक-दिवसीय वर्ल्ड कप के दौरान नवें विकेट के लिए आज तक भी सबसे बड़ी पार्टनरशिप है, और वन-डे क्रिकेट के पूरे इतिहास में नवें विकेट के लिए इससे अधिक रनों की साझेदारी सिर्फ एक बार वर्ष 2010 में श्रीलंका बनाम ऑस्ट्रेलिया मैच में बनी थी I आप खुद देख सकते है कि इस रिकार्ड को टूटने में 27 साल लग गये I और 27 सालों तक यह विश्वरिकार्ड बना रहा हालाँकि वर्ल्ड कप में आज भी यह सबसे बड़ी पारी ही है I

कपिल देव ने अपनी इस ऐतिहासिक पारी के दौरान धुआंधार बल्लेबाजी करते हुए मात्र 138 गेंदों का सामना किया रु 16 चौकों और 6 गगनभेदी छक्कों की मदद से 175 रनों की विशाल पारी खेल डाली I इस मैच की सबसे बड़ी खासबात यह रही कि एक ओर जहां भारतीय टीम का कोई भी खिलाड़ी ज़िम्बाब्वे के गेंदबाजों का सामना नहीं कर पाया, वहीं कपिल के लिए जैसे वे स्कूली बच्चे थे, जिनकी गेंदों में एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के बल्लेबाज के खिलाफ कोई धार ही नहीं हो। कपिल के अलावा कोई भी बल्लेबाज इस मैच में कामयाब नहीं हो सका I आप इस बात का अंदाज़ा सिर्फ इसी बात से लगासकते हैं कि टीम इंडिया की तरफ से कपिल देव 175 (नॉट आउट) के आंकड़े के साथ सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी रहे तो उनके बाद सर्वाधिक रन बनाने वालों में भारत की तरफ से विकेटकीपर सैयद किरमानी रहे जिन्होंने 24 रन बनाये थे I कपिल के इस स्कोर के साथ भारतीय टीम ने एक सम्मानजनक स्कोर हासिल किया जो कि 266 रनों का था जिसमें से 175 रन अकेले कपिल के ही थे I

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भारत की तरफ से खेलने वाले दोनों सलामी बल्लेबाज सुनील गावस्कर और कृष्णमाचारी श्रीकांत शून्य पर और संदीप पाटिल और रवि शास्त्री 1-1 रन पर आउट हुए, जबकि मोहिन्दर अमरनाथ ने 5 तथा यशपाल शर्मा ने 9 रन बनाए। दहाई के आंकड़े को कपिल और किरमानी के अलावा कुल दो बल्लेबाजों ने छुआ, जिनमें से मदनलाल ने 17 और रोजर बिन्नी ने 22 रनों का योगदान दिया। ज़िम्बाब्वे की ओर से रॉसन और कुर्रन ने तीन-तीन तथा कप्तान डंकन फ्लेचर तथा जॉन ट्रायकॉस ने एक-एक भारतीय खिलाड़ी को पैवेलियन का रास्ता दिखाया I
बल्लेबाजी में कुछ ख़ास प्रदर्शन न करने के बाद जिस टीम इंडिया के हौसले पस्त हो चुके थे उन्हें हार साफ़ नजर आ रही थी कपिल की इस धुआंधार पारी की बदौलत आत्मविश्वास पुनः वापस मिल चुका था I उसके बाद गेंदबाजी करने उतरे भारतीय गेंदबाजों ने बेहद सधी हुई गेंदबाजी की और ज़िम्बाब्वे के किसी भी खिलाड़ी को ज्यादा देर तक मैदान में टिकने का मौका नहीं दिया I ज़िम्बाब्वे की तरफ से सबसे अधिक कामयाब केविन कुर्रन रहे जिन्होंने 93 गेंदों में आठ चौकों की मदद से 73 रनों का योगदान दिया, और दूसरे नंबर पर रहे सलामी बल्लेबाज रॉबिन ब्राउन, जिन्होंने 66 गेंदों का सामना कर दो चौकों की मदद से 35 रन बनाए। इन दोनों बल्लेबाजों के अलावा कोई भी बल्लेबाज ज़्यादा देर तक भारतीय गेंदबाजों का सामना नहीं कर सका I और पूरी की पूरी ज़िम्बाब्वे की टीम 57 ओवर में कुल 235 रन बनाकर ऑल आउट हो गई।
गेंदबाजी में भारत की तरफ से मदनलाल ने सर्वाधिक 42 रन देकर तीन विकेट लिए तो वही रोजर बिन्नी ने 45 रन देकर दो खिलाड़ियों को पवेलियन का रास्ता दिखाया I इनके अलावा कप्तान कपिल देव, बलविन्दर संधू और मोहिन्दर अमरनाथ ने एक-एक विकेट चटकाया। ज़िम्बाब्वे के दो खिलाड़ी भारतीयों की चुस्त फील्डिंग का शिकार होकर रन आउट हुए।
इस मैच के बाद भारतीय खिलाड़ियों के शरीर में जैसे नई जान आ गयी हो फिर इस टीम ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा और विश्वविजेता बन कर ही वापस आये I

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