एटीएम कार्ड की स्कीमिंग कर खाता से रकम उड़ाने के मामलों में पीड़ितों की संख्या पहुंची 85 के पार

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प्रतीकात्मक

देहरादून(ब्यूरो)- एटीएम कार्ड की स्कीमिंग कर खाता से रकम उड़ाने के मामलों में पीड़ितों की संख्या 85 पहुंच गई है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआइ) ने सख्त लहजे में कहा है कि साइबर ठगी के शिकार लोगों का पैसा लौटाना बैंकों की जिम्मेदारी है। बैंक पीड़ितों को एफआइआर दर्ज कराने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। ऐसे मामलों में बैंकों को पीडि़तों की शिकायत अविलंब दर्ज करनी होगी। इसके अलावा पुलिस जांच में किसी भी तरह की सूचना उपलब्ध कराना बैंकों की जिम्मेदारी है।

एटीएम कार्ड की स्कीमिंग कर तमाम दूनवासियों के खातों से हुई निकासी के मामले में आरबीआई हरकत में आ गया है। राजपुर रोड स्थित आरबीआइ कार्यालय में बैंक के महाप्रबंधक सुब्रत दास ने सभी बैंकों के अधिकारियों संग बैठक की। उन्होंने बैंकों को निर्देश दिए कि छह जुलाई को आरबीआई की ओर से अवैध ई-ट्रांजेक्शन को लेकर जारी किए गए सर्कुलर के मुताबिक बैंक पीडि़तों को उनकी रकम लौटाने के लिए कार्रवाई करें।

पीड़ित खाताधारक की शिकायत सही पाए जाने पर नुकसान की भरपाई करने का जिम्मा बैंकों का है। साथ ही कहा कि जिन मामलों की जांच पुलिस कर रही है, उनमें किसी भी तरह की सूचना या कागजात की जरूरत पड़ती है तो बैंक उपलब्ध कराए। इस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक निवेदिता कुकरेती सहित विभिन्न बैंकों के अधिकारी मौजूद रहे।
ऐसे दर्ज करा सकते हैं शिकायत आरबीआई के महाप्रबंधक सुब्रत दास ने कहा कि ठगी के शिकार लोग संबंधित ब्रांच में जाकर या एसएमएस, मेल आइबीआर, टोल फ्री नंबर आदि के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। पीड़ित तीन कार्य दिवस के अंदर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

बैंक को दिए ये निर्देश
-प्रत्येक एटीएम में एंटी स्कीमिंग डिवाइस लगाएं।
-पुराने एटीएम की जगह नई मशीनें लगाई जाएं।
-ग्राहकों को सिक्योरिटी चिप लगे एटीएम उपलब्ध कराए जाएं।
-एटीएम में हाई क्वालिटी कैमरे लगाएं, नियमित रूप से हो रिकार्डिंग की जांच।
-हर एटीएम में सुरक्षा गार्ड की तैनाती हो, नियमित सुरक्षा जांच कराई जाए।
-ग्राहकों को जागरूक करने के लिए प्रचार-प्रसार करें।

छह और एटीएम फ्राड का शिकार, 85 को चपत-
एटीएम कार्ड की स्कीमिंग कर दूनवासियों के खाते से रुपये निकाले जाने के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। अब छह और पीड़ित सामने आए, जिसके बाद पीड़ित खाताधारकों की संख्या बढ़कर 85 हो गई। चार दिन से सुर्खियों में चल रहे इस प्रकरण की तह तक जाने के लिए दून पुलिस और एसटीएफ ने पूरी ताकत झोंक रखी है। हालांकि, दिन-रात एक किए पुलिस अधिकारियों के हाथ अब तक चंद सुराग ही लगे हैं।

मंगलवार को पांच मामले साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन (सीसीपीएस) और एक मामला पटेलनगर कोतवाली में दर्ज किया गया। इसमें जोगीवाला के एक खाते से डेढ़ लाख रुपये की निकासी आठ जुलाई को ही हो गई थी, लेकिन खाताधारक को इसकी जानकारी सोमवार को हुई। वहीं, लगातार बढ़ रहे मामलों से बैंकों के साथ ही पुलिस विभाग में भी हड़कंप मचा हुआ है। मंगलवार को बैंकों और पुलिस कार्यालयों में दिनभर बैठकों का दौर चलता रहा। अधिकारी जयपुर और दिल्ली गई टीमों से भी अब तक की जांच का फीडबैक लेते रहे।

एसएसपी एसटीएफ रिधिम अग्रवाल ने बताया कि साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन दर्ज हुए सभी मामले विवेचना के लिए संबंधित थानों को ट्रांसफर किए जाएंगे। ये मामले साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में इसलिए दर्ज किए गए ताकि पीडि़तों को भटकना न पड़े।

एसएसपी एसटीएफ ने बताया कि सभी मामलों की विवेचना के लिए चमोली के इंस्पेक्टर पंकज पोखरियाल को दून बुलाकर लीड इन्वेस्टीगेटर बनाया गया है। वह नेहरू कॉलोनी, कोतवाली, पटेलनगर, डालनवाला, पटेलनगर और रायपुर में दर्ज मामलों की विवेचना कर रहे उप निरीक्षकों के साथ समन्वय बनाकर जांच आगे बढ़ाएंगे। वहीं, एसटीएफ के इंस्पेक्टर संदीप नेगी को को-ऑर्डिनेटर बनाया गया है। वह सभी टीमों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान को समन्वय स्थापित करेंगे। इसके साथ साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन से टीमों को टेक्नीकल सपोर्ट देने के लिए भी एक टीम बनाई गई है, जिसमें एक एसआइ और दो कांस्टेबल हैं। यह टीम जुटाए गए डाटा का विश्लेषण करेगी और जो इनपुट मिलेंगे उन्हें अन्य टीमों के साथ साझा करेगी।

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