गाँव में विकास की बात मात्र हौआ

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चकलवंशी(उन्नाव)- प्रदेश सरकार से लेकर केन्द्र सरकार तक समाज के आखिरी व्यक्ति के सम्पूर्ण विकास की बात करने मे नही थक रही है लेकिन हकीकत कुछ अलग ही है। ग्राम पंचायतों के चुनाव हुए लगभग दो साल होने को आ रहे हैं। मनरेगा से लेकर सारे विकास कार्य बन्द पड़े हैं। जब गांवों में विकास कार्य नहीं होगे तो समाज के आखिरी व्यक्ति तक के विकास की बात करना गरीबों के साथ कोरा मजाक है।

गांव का गरीब सरकार की गलत नीतियों के कारण शहरों की ओर पलायन करने के लिए मजबूर हैं। कही भी किसी भी ग्राम पंचायत में कोई भी विकास का कार्य नहीं हो रहा है। लेकिन सत्ता में बैठे हुए लोग विकास की गंगा बहाने की बात करते नही थक रहे। अगर सरकार कथनी के बजाय करनी पर अमल करते हुए गांवों के विकास के विषय मे शीघ्र कोई ठोस निर्णय नहीं लेती है। तो इसका खामियाजा सन् 2019 के लोक सभा के चुनाव में भोगना पडे़गा इसमें जरा भी सन्देह नही है क्योंकि जनता अब जागरुक हो चुकी है।

रिपोर्ट- जितेन्द्र गौड़ 

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