रीपरविद बाइण्डर मशीन के प्रयोग पर लगेगा जुर्माना

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बलिया(ब्यूरो)- मा. राष्ट्रीय हरित अधिकरण  द्वारा ओए सं0-21/2014 वर्धमान कौषिक बनाम यूनियन आफ इण्डिया व अन्य एवं ओए सं0-118/2013 चिक्रान्त कुमार तोगड बनाम इन्वायरमेंन्ट पाल्यूषन (प्रिनवेन्ष कन्ट्रोल) अथारिटी व अन्य के अन्तर्गत पारित आदेषों के क्रम में किसानों द्वारा किसी भी दषा में अपने फसल अपषिश्टों को न जलाया जाय, अपितु फसल अपषिश्टों का उपयोग वैकल्पिक उपयोगी यथा-बायों एनर्जी, कम्पोस्ट खाद आदि में करें। साथ ही साथ जनपद के समस्त कम्बाईन मालिकों को निर्देषित किया जाता है कि जो बिना रीपरविद बाइण्डर मषीन का प्रयोग करता पाया जायेगा। उसके कम्बाईन मषीन को कृशि विभाग के अधिकारियों के साथ सीजर की कार्यवाही की जायेगी तथा जिन किसानों द्वारा अपने फसल अपषिश्टों को जलाया है तो उसके विरूद्ध 02 एकड़ तक के किसानों को रू. 2500, 02 एकड़ से 05 एकड़ तक के किसानों को रू. 500 तथा 05 एकड़ से अधिक पर रू0-1500 का जुर्माना लगेगा।

उपरोक्त के क्रम में जनपद के समस्त किसान बन्धुओं से उप कृशि निदेषक टीपी षाही ने कहा है कि अपने फसल अपषिश्टों को कदापि न जलाये। अपितू फसल अपषिश्टों द्वारा वैकल्पिक उपयोगों यथा-बायों  एनर्जी, कम्पोस्ट खाद इत्यादि के लिए करें जिससे खेतों की उर्वरक षक्ति के साथ ही साथ उनके एकीकृत पोषक तत्व प्रबन्धन के धटक के रूप में फसल अवषेश के उपयोग के फलस्वरूप मृदा में कार्बनिक  पदार्थ की बढ़ोतरी से मृदा जीवाणुओं की क्रियाषीलता बढ़ती है, जिससे उत्पादन बढ़ता है। पादप अवषेश मल्चक रूप में प्रयोग करने से मृदा जल संरक्षण के साथ-साथ फसलों को खतपतवारों से बचाने में भी सहायक है, मृदा के जीवाष में हो रहे लगातार हा्रस को कम करने में योगदान करता है। मृदा जलधारण क्षमता एवं मृदा वायु संचार में बढोतरी होती है। अगले फसल के उत्पादन में काफी लाभ भी मिलेगा तथा उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि कर अपनी आर्थिक स्थिति में महत्वपूर्ण योगदान के साथ-साथ कृशि की विकास दर में भी वृद्धि कर सकेगें।

रिपोर्ट- संतोष कुमार शर्मा

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