गमगीन माहौल में डूंहा से निकली बारात, नियती के क्रूर मजाक को कोसते रहे लोग

सिकन्दरपुर/बलिया(ब्यूरो)- क्षेत्र के डूंहा में अरविंद प्रजापति के दामाद दिवाकर की शनिवार को घाघरा नदी में डूबकर हुई मौत के दूसरे दिन भी गांव का माहौल गमगीन रहा। लोग जगह जगह इकट्ठा हो दिवाकर की अकाल मौत के बारे में ही चर्चा करते रहे। सभी को यह खल रहा है कि दामाद की मौत का कलंक पूरे गांव पर लग गया। सभी नियती के क्रूर मजाक को कोस रहे थे कि उसने लंबे समय तक हमें बदनामी का दर्द झेलने को भी विवश कर दिया है।

उधर मृतक दिवाकर के पिता सीताराम कुछ लोगों की सहायता से उसका शव शाम लेकर अपने गांव मऊ जनपद के सिंघही गांव चले गए जहां रात में ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया, जबकि अरविंद प्रजापति के पुत्र विशुंजय की शादी का कार्यक्रम भी रात में ही गमगीन माहौल में किसी प्रकार कर दिया गया। शादी और बारात वापस आने के बाद भी अरविंद के आवास पर सन्नाटा पसरा हुआ है। दरवाजे पर परिवार के सदस्यों सहित नाते-रिश्तेदार पूरे दिन उदास बैठे रहे।

परिवार वालों के गम का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसके मुंह से बोल नहीं निकल पा रहे हैं। वे इशारों इशारों में ही एक दूसरे से बात कर रहे हैं। हां सांत्वना देने आने वाले लोगों के कारण रह-रहकर क्षणभर के लिए सन्नाटा टूट जा रहा है। उनके आने की खबर सुन मकान के अंदर से महिलाओं के रुदन की आवाज अवश्य लोगों के कानों में पड़ जा रही है। उधर अरविंद को यह साल रहा है कि शादी के तीन वर्ष बाद दामाद दिवाकर पहली बार उनके घर आया जिसे हसीं खुशी उसके घर विदा नहीं कर पाये और वह अपने घर वापस न जाकर उस स्थान को चला गया जहां से कोई वापस नहीं आता है।

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