अस्तित्व बचाने की राह में खड़ा जनऊपुर का तालाब

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रतसर (बलिया ब्यूरो): तालाब कभी जल संरक्षण में महती भूमिका निभाते थे, लेकिन समय बदला तो इन तालाबों की खुद संरक्षण की दरकार हो गई। ऐसा ही एक तालाब विकास खण्ड गड़वार के गांव जनऊपुर में भी संरक्षण के इन्तजार में है। कब्जों की भूल-भुलैया में तालाब का एक चौथाई हिस्सा गुम हो गया है।

लेकिन किसी ने भी इसे कब्जा मुक्त कराने की पहल नही की। गांव के किनारे एक एकड़ में बना तालाब की खुदाई कब हुई इस बारे में गांव के बुजुर्ग श्री ब्रह्मदत्त पाण्डेय ने बताया कि पहले गांवों में मिट्टी के घर बनाए जाते थे उसके लिए इन तालाबो की खुदाई की जाती थी इससे दो काम हो जाते थे एक तो घर का निर्माण होता था और दुसरा जल संरक्षण का बहुत बढिया संसाधन की व्यवस्था हो जाती थी।

गांवों में कुड़ा प्रबन्धन की उचित व्यवस्था न होने के कारण आमजनों द्वारा गन्दगी फेके जाने के कारण यह तालाब विषाक्त हो गया है। तथा धीरे-धीरे इसका दायरा सिमटता जा रहा है। गन्दगी के अम्बार के कारण तालाब का पानी हरा हो गया है एवं जल कुम्भी ने पूरी तरह से अपने आगोश में ले लिया है। लेकिन न तो ग्रामीण इसके संरक्षण की पहल करते है और न ही ग्राम प्रधान। अगर जल्द ही इस ओर ध्यान न दिया गया तो वह दिन दूर नही जब तालाब का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।

रिपोर्ट- धनेश पांडेय

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