पद का धौंस दिखा कर किया दूसरे की संपत्ति पर कब्ज़ा

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सुल्तानपुर(ब्यूरो)- अधिवक्ता के बैनामे की जमींन पर विपक्षी पुलिसकर्मी के जरिये अपने विभाग की सह से जेसीबी लगाकर जबरन कब्जे का प्रयास किया गया। जिसके संबंध में अधिवक्ता ने शिकायत की तो काफी जद्दोजहद के बाद लंभुआ पुलिस ने काम रूकवाया। फिलहाल अभी भी विपक्षी स्थानीय पुलिस को मिलाकर कब्जा करने के प्रयास में लगे हुए है। मामला लंभुआ थानाक्षेत्र के सरैया अम्बरसिंह का पुरवा गांव का है। जहां के रहने वाले अधिवक्ता गिरीश कुमार मिश्रा के मुताबिक उन्होंने गांव के ही रमाशंकर से वर्ष 2009 में आबादी व खाते की भूमि जरिये बैनामा क्रय किया और उसके बाद से ही लगातार उस जमीन पर इनका ही कब्जा है लेकिन सोमवार की सुबह इसी जमींन पर पड़ोस के रहने वाले सिपाही शिवदयाल ने अपने पद की हनक दिखाकर अपने सहयोगी प्रधान पुत्र अशोक हरिजन आदि के साथ जेसीबी लगवाकर जबरन खुदाई करवाने लगे।

इसकी जानकारी मिलते ही अधिवक्ता गिरीश कुमार ने 100 नम्बर पर पुलिस को सूचना दी, उन्होंने पुलिस के जरिये कागजात मांगे जाने पर अपने बैनामे आदि के दस्तावेज भी दिखाए, लेकिन विपक्षी पुलिस कर्मी के पक्ष में काम कराने के मूड में आई पुलिस को यह सब कागजात पर्याप्त ही नही लग रहे थे| नतीजतन उनके तय सौदे के मुताबिक काम न रुके इसलिए वे अधिवक्ता गिरीश मिश्रा से स्टे आदेश व लेखपाल से तुरंत ही वह जमीन नपवाकर अपने पक्ष में साबित करने पर ही काम रोक पाने का बहाना मारने लगे, क्योंकि पुलिस जान रही थी कि जब तक स्टे आदेश व लेखपाल से पैमाइश कराकर अपने पक्ष में जमीन साबित करने का प्रयास करेंगे| तब तक वे विपक्षी से तय हुआ वायदा पूरा करा देंगे| आलम यह रहा कि लंभुआ की महान पुलिस यह सब प्रक्रियाएं करने के दौरान काम भी नही रुकवाना चाहती थी। इस तरह से लंभुआ पुलिस की यह भूमिका देखने को मिली कि शायद अगर किसी के घर पर भी कोई कब्जा करें तो गृह स्वामी जब तक अपना मकान साबित करने के लिए कगाजात इकट्ठा करेगा, तब तक तो वह मकान ही दूसरे के कब्जे में हो जाएगा और असली मकान मालिक की जिंदगी उसे अपना साबित करने में मुकदमा लड़ते लड़ते ही बीत जायेगी।

मिली जानकारी के मुताबिक इस जमीन को अपना बताकर कब्जे के प्रयास में जुटे शिवदयाल खुद को बैनामेदार होना बता रहे है, लेकिन उनका वह बैनामा ही वर्ष 1998 में अदालत के जरिये शून्य करार दे दिया गया है, ऐसे में क़ानून की माने तो जब तक शिवदयाल अपने शून्य करार दिए गए | बैनामें के आदेश के विरुद्ध कोई आदेश नही लाकर दे देते है, तब तक उनका उस जमीन पर कब्जा करने का आधार ही नही है, लेकिन वह अपनी वर्दी की हनक व स्थानीय पुलिस को मिलाकर अवैध कब्जे के प्रयास में लगे हुए है। इस संबंध में प्रभारी कोतवाल ताराचन्द्र पटेल भी पूंछने पर गोलमोल जवाब दे रहे है। सूत्रों की मानें तो कोतवाल चंद्रशेखर सिंह किसी आवश्यक कार्य से कल बाहर गए हुए थे|

इसी दौरान मौका पाकर विपक्षियों ने प्रभारी ताराचंद्र पटेल से बातचीत की और उन्होंने भी कोतवाल की गैर मौजूदगी का फायदा उठाते हुए सौदा तय कर लिया और विपक्षियो को जेसीबी लगवाकर कब्ज़ा करने की हरी झंडी दे दी| तारा चंद्र पटेल की इस कार्यशैली को देखने से लगता है कि सूबे में सरकार बदलने पर सभी ने अपने तौर तरीकों में सुधार कर बदलाव ला लिया है, लेकिन यह है कि अभी सपा राज की तरह ही पुराने ढर्रे पर कायम है, अधिवक्ता गिरीश मिश्र ने इस प्रकरण को अधिवक्ता संघ में उठाने व मुख्यमंत्री को भी पत्र भेजकर पुलिस की कारगुजारी से अवगत कराने की बात कही है।

रिपोर्ट- संतोष कुमार यादव
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