राम कथा का श्रोताओ ने किया रसपान

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बबुरी चन्दौली(ब्यूरो)- स्थानीय क़स्बा स्थित शिव मंदिर  पोखरे पर आयोजित राम कथा का शुभारम्भ  काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य अनंत श्री विभूषित स्वामी नरेन्द्रा नन्द सरस्वती जी ने दीप प्रज्वलित कर किया। स्वामी जी ने इस मौके पर कहा कि भारतीय संस्कृति के विकास आदि शंकराचार्य विशेष योगदान रहा है आचार्य शंकर प्रसाद शुक्ल पंचमी सन 788 बताया जाता रहा है परन्तु सुन्धवा जो कि शंकर के समकालीन थे उनके ताम्रपत्र अभिलेख में शंकर का जन्म युधिष्ठिराब्द 2631शक (507ईसा पूर्व) तथा शिवलोकगमन युधिष्ठिराब्द 2663 (475ईसा पूर्व) सर्वमान्य है जो मालाबार प्रान्त वर्तमान के केरल राज्य में हुआ था। इनकि माता का नाम विशिष्टा देवी व पिता शिवगुरु नामपुद्री था।

स्वामी जी ने समाज में व्याप्त सामाजिक कुरीतियों के  प्रति लोगों को सचेत किया तथा कहा कि जिस देश में लड़कियों की पूजा देवियों के रुप में की जाती है वहां पर लड़कियों की हत्या गर्भ में ही कर दी जा रही है जोकि सर्वथा अनुचित है इसलिए आप लोग से विनम्र निवेदन है कि इस कुप्रथा को इस देश से बाहर करने में सहयोग प्रदान करें। तत्पश्चात निकुंज श्रीधाम अयोध्या से पधारे प्रवक्ता कथा भास्कर आचार्य रत्नेश जी महाराज ने लोगों को रामकथा का रसपान कराया।

रिपोर्ट- रोहित वर्मा

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