व्यापारिक प्रतिस्पर्धा का खामियाजा उठा रही है जनता

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जगदलपुर/छत्तीसगढ़(रा. ब्यूरो)- औद्योगिकरण की ओर बस्तर को लेजाने के सरकारी दावे के बीच बीजेपी की निरंकुशता के चलते बस्तर विकास से पहले विनाश की ओर निकल पड़ा है। जहाँ शांत बस्तर में उद्योगों की स्थापना और असतित्व में आने से पहले ही खूूनी संघर्ष शुरू हो चुका है।

रमन सरकार पहले अपनी कानून व्यवस्था को सुदृण करे और इसके बाद ही विकास की बयार बहाए। हालिया खूटपदर की घटना को लेकर चित्रकोट विधायक दीपक बैज ने कहा है कि सरकार में बैठे लोग ही अपने स्वार्थ और करोड़ों की आय के लिए जो खेल खेल रहे हैं ,वह गलत है,और उस क्षेत्र के प्रभावित किसान अपने हक के लिए दर दर भटक रहे है,सरकार को इनकी चिंता नही है। सरकार अगर ये काम वहाँ के प्रभावित व स्थानीय बेरोजगारों को दिया होता, तो वहाँ की तस्वीर अलग होती है|

यही कारण है कि जब नगरनार इलाके में परिवहन को लेकर विवाद शुरू हुआ तो इसे क्षेत्र की पुलिस ने गंभीरता से नहीं लिया। यदि पुलिस पहले ही सख्त कार्रवाई कर आला अधिकारियों को इस इलाके में काम करने वालों की जानकारी देती तो बड़ी वारदात टाली जा सकती थी।

ऐसा नहीं किए जाने से जो वारदात हुई इसके बाद ऐसा लगता है कि शासन अपनी खामियों छिपाने का प्रयास कर रही है। मामले को लेकर सरकार जहां चौतरफा दबाव बना रही है वहीं सरकार के द्वारा अब बस्तर के परिवहन संसाधनों पर ग्रहण लगाने की तैयारी में हैं।

मुक्त व्यापार की प्रथा और जनता को राहत देने का ख्याल सरकार को इतने सालों से क्यों नहीं आया। आज इस घटना के बीच ऐसा किया जाना समझ से परे है। यह घटना राजनीति से कितनी ओतप्रोत है इसका नमूना भी कांग्रेसी दल ने मौके पर पहुंचकर देखा।

राजनीतिक द्वेष के चलते ही कांग्रेस के पदाधिकारियों को भी इस मामले में लपेटा जा रहा है। सरकार जानती है कि ऐसा किए जाने से ही वह अपनी किरकिरी से बच सकती है। मालूम हो कि परिवहन व्यापार से जुड़े सरकार के ही लोग हैं। लेकिन कांग्रेसियों के कंधे पर बंदूक रखकर सरकार दबाव की राजनीति कर रही है।।

रिपोर्ट-हरदीप छाबड़ा

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