मशरूम उत्पादन एवं प्रसंस्करण तकनीक पर दिया गया प्रशिक्षण

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राजनांदगांव/छत्तीसगढ- राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 24 जनवरी 2017 को विकासखंड अम्बागढ़ चौकी के ग्राम मुरेटीटोला में मशरूम उत्पादन एवं प्रसंस्करण तकनीक पर एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण दिवस का आयेाजन किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में पंडित शिव कुमार शास्त्री कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र राजनांदगांव द्वारा विभिन्न स्वम सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं, कृषकों एवं प्रशिक्षणार्थियों को मशरूम उत्पादन एवं प्रसंस्करण तकनीक पर प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में सभी प्रशिक्षणार्थियों को मशरुम स्पॉन (बीज) का भी वितरित किया गया।

प्रशिक्षण में कृषि महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. नितिन कुमार तुर्रे ने मशरूम उत्पादन तकनीक पर विस्तार से जानकारी देते हुए प्रशिक्षणार्थियों को जीवंत प्रदर्शन कर दिखाया। उन्होनें प्रशिक्षण में बताया कि बरसात के दिनों में छतरीनुमा रचनाएं पेड़-पौधों के आसपास उग आती है। जिन्हें कुकुरमुत्ता या पिहरी या फुटू के नाम से जाना जाता है, जो कि प्राकृतिक रूप से गांवों एवं जंगली क्षेत्रों में बहुतायत से उगे हुए पाये जाते हैं। उन्होनें बताया कि फुटू यानि मशरूम को कृत्रिम रूप से भी उगाया जा सकता है । मशरूम में सुपाच्य प्रोटीन, विटामिन, खनिज तत्व एवं रेशेदार तत्व प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं। साथ ही इससे भांति-भांति के स्वादिष्ट व्यंजन भी बनाये जा सकते हैं। इसकी खेती कम लागत व कम जगह में की जा सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगार युवकों, महिलाओं व कृषकों के लिये स्वरोजगार के विकल्प के रूप में आय के अतिरिक्त जरिया के रूप में मशरूम उत्पादन फायदेमंद सिद्ध हो सकता है।

डॉ. नितिन कुमार तुर्रे ने प्रशिक्षण में बताया कि खेती के साथ-साथ कृषक मशरूम का उत्पादन कर भी अर्थिक लाभ कमा सकते हैं। छत्तीसगढ़ में पलायन व कुपोषण की समस्या तथा अनेक रोगों जैसे रक्तचाप, मोटापा, मधुमेह, कब्ज, हृदय रोग से निजात पाने के लिए भी मशरूम की खेती एक आदर्श व्यवसाय हो सकता है । मशरूम शाकाहारी, सुपाच्य तथा उच्च कोटी के प्रोटीन युक्त पौष्टिक तथा स्वादिष्ट सब्जी है। जिसका भोजन के रूप में सेवन किया जा सकता है। यह सभी उम्र के लोगों के लिए श्रेष्ठ पौष्टिक आहार है। मशरूम का 100 से 150 ग्राम प्रतिदिन प्रति व्यक्ति की दर से सेवन विभिन्न जटिल रोगों से बचाव में लाभदायक है।

उन्होनें बताया कि मशरूम में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन, खनिज तत्व व विटामिन्स होते है, जिससे इसका सेवन कुपोषण प्रभावित श्रमिक, महिलाओं तथा बच्चों के लिये सुझाया गया है। मशरूम से कई प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन जैसे- मशरूम सूप, मशरूम अचार, मशरूम सलाद, मशरूम की सब्जी, मशरूम पकौड़े, मशरूम भजिया, मशरूम आमलेट, मशरूम सैंडविच, मशरूम बिरयानी, मशरूम पुलाव, मशरूम समोसा, मशरूम पराठा, मशरूम कटलेट बनाये जा सकते है। कृत्रिम रूप से मशरूम उत्पादन करने के लिये कई किस्म जैसे – आयस्टर मशरूम, सफेद बटन मशरूम, सफेद दूधिया मशरूम, धान का पैरा मशरूम को उगाया जा सकता हैं । इस अवसर पर सहायक प्राध्यापक डॉ. विनम्रता जैन ने कृषकों से अन्य फसलों पर चर्चा करके उनकी शंकाओं का समाधान भी किया। कार्यक्रम का संचालन सहायक प्राध्यापक डॉ. अभय बिसेन ने किया। कार्यक्रम में ग्राम के सरपंच, कृषि महाविद्यालय के अनुसंधान सहायक श्री सुनील कुमार, श्री ए. रजक भी उपस्थित थे।
रिपोर्ट-हरदीप सिंह छाबड़ा

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