भारतीय फार्माकोपिया आयोग का दक्षिण-पूर्व एशिया में दवाओं और टीकों की सुरक्षा के लिए डब्ल्यूएचओ का पहला सहयोग केंद्र बनना तय – श्री नड्डा

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http://tservices.ro/library/prikaz-na-naznachenie-i-viplatu-posobiya.html приказ на назначение и выплату пособия The Union Minister for Health & Family Welfare, Shri J.P. Nadda releasing to brochure at the inauguration of the 38th Annual Meeting of Representatives of National Pharmacovigilance Centres participating in the World Health Organization (WHO) Programme for International Drug Monitoring, organised by the Indian Pharmacopoeia Commission (IPC) and WHO, in New Delhi November 04, 2015. 	The Secretary, Ministry of Health and Family Welfare, Shri B.P. Sharma, the DGHS, Dr. (Prof.) Jagdish Prasad and other dignitaries are also seen.

http://bp.ves.bodyprinting.net/library/aktivirovanniy-ugol-instruktsiyado-edi.html активированный уголь инструкциядо еды भारतीय फार्माकोपिया आयोग (आईपीसी) का दक्षिण-पूर्व एशिया में दवाओं और टीकों की सुरक्षा के लिए विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (डब्‍ल्‍यूएचओ) का पहला सहयोग केंद्र बनना तय है। यह बात केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने अंतर्राष्‍ट्रीय औषधीय निगरानी के लिए डब्ल्यूएचओ कार्यक्रम में भाग ले रहे राष्‍ट्रीय फार्माकोविजिलेंस केन्‍द्रों के प्रतिनिधियों की 38वीं सालाना बैठक में कही। इस बैठक का आयोजन आज यहां आईपीसी और डब्ल्यूएचओ द्वारा किया गया था।

http://www.adamnowlin.com/library/kostyum-zaychika-svoimi-rukami.html костюм зайчика своими руками श्री नड्डा ने कहा कि औषधि सुरक्षा से जुड़े मामले स्‍वास्‍थ्‍य की देखरेख से संबंधित व्‍यवसायियों, नियंत्रकों और औषधि निर्माण उद्योग के लिए बहुत बड़ी चुनौती हैं, ऐसे में चिकित्‍सा उत्‍पादों की गुणवत्‍ता, सुरक्षा और प्रभाव सुनिश्चित करने की दिशा में फार्माकोविजिलेंस द्वारा महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई जाती है। इसके द्वारा निभाई जाने वाली महत्‍वपूर्ण भूमिका को देखते हुए ये आवश्‍यक है कि फार्माकोविजिलेंस को प्रतिकूल प्रभावों को समझने और उनसे बचाव अथवा औषधि से संबंधित अन्‍य समस्‍याओं के लिए एक प्रभावी माध्‍यम के रूप में वि‍कसित किया जाए। भारत में सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य की सुरक्षा की दिशा में भी फार्माकोविजिलेंस तेजी से महत्‍वपूर्ण बनता जा रहा है।

http://regionalcit.es/owner/kak-uhazhivat-za-plyushem-rebenka.html स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने जोर देकर कहा कि फार्माकोविजिलेंस की सफलता अत्‍याधुनिक रिपोर्टिंग, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के लाभपूर्ण उपयोग और तात्‍कालिक सुधारात्‍मक उपायों के लिए सूचना के विश्‍लेषण पर निर्भर करती है। उन्‍होंने कहा कि इसको बेहद सटीक लेखा परीक्षण प्रक्रिया के समर्थन की जरूरत है। उन्‍होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य निष्‍कर्ष सुनिश्चित करने के लिए सभी देशों में फार्माकोविजिलेंस का सशक्‍त ढांचा तैयार करने की जरूरत है। इसके लिए बड़ी संख्‍या में व्‍यवसायियों और विविध क्षेत्रों के हितधारकों के बीच राष्‍ट्रीय और अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर निकट सहयोग तथा फार्माकोविजिलेंस के संबंध में अंतर्राष्‍ट्रीय मान्‍यता प्राप्‍त मापदंडों की आवश्‍यकता होगी।

макситрол мазь инструкция श्री नड्डा ने दुनिया भर के डब्‍ल्‍यूएचओ सहयोग केन्‍द्रों की सराहना की। ये केन्‍द्र ज्ञान के हस्‍तांतरण के मंचों के रूप में सेवायें देते हैं और अगले स्‍तर की अच्‍छी फार्माकोविजिलेंस पद्धतियों को विकसित करने तथा औषधि के प्रतिकूल प्रभावों के लिए जागरूकता और उनकी रिपोर्टिंग के लिए मुख्‍य स्रोत का कार्य करते हैं। सुदृढ़ फार्माकोविजिलेंस प्रणाली की स्‍थापना और इसकी पहुंच, गुणवत्‍ता और विश्‍वसनीयता बढ़ाना सुरक्षित चिकित्‍सा उत्‍पादों के विकास के लिए महत्‍वपूर्ण है।

http://www.techbuzzer.org/owner/tovaro-transportnaya-nakladnaya-ukraina-2015-blank.html товаро транспортная накладная украина 2015 бланк श्री नड्डा ने कहा कि भारत, देश के भीतर मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और फार्माकोविजिलेंस सहित स्‍वास्‍थ्‍य सेवा व्‍यवस्‍था के संदर्भ में अन्‍य देशों के साथ मजबूत कामकाजी संबंध कायम करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्‍होंने कहा कि भारत सरकार ने मरीजों पर होने वाली प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं के प्रभाव को दूर करने के लिए 2010 में फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम प्रारंभ किया था। उन्‍होंने कहा कि इस कार्यक्रम में मरीजों की सुरक्षा संबंधी रिपोर्टिंग, बाजार में लाई गई दवाओं के जोखिम लाभ अनुपात की पहचान और विश्‍लेषण करने, दवाओं की सुरक्षा के बारे में प्रमाण तैयार करने तथा निर्णय लेने में विनियामक एजेसियों की सहायता करने के लिए एक राष्‍ट्रव्‍यापी व्‍यवस्‍था बनाई है।

план инвестиционного развития स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने कहा कि भारतीय फॉर्माकोपिया आयोग के फार्माकोविजिलेंस के लिए राष्‍ट्रीय समन्‍वयन केन्‍द्र के रूप में अधिसूचित होने के बाद से हमारे प्रयासों में तेजी आई है। दवाओं की प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं की निगरानी के लिए भारत के फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम ने 179 केन्‍द्रों की स्‍थापना की है। दवाओं की प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं की जानकारी भारतीय फॉर्माकोपिया आयोग को दी जाती है। यह आयोग दवाओं की प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं के वैश्विक डाटाबेस में योगदान देने के लिए दवाओं की प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं के वैश्विक निगरानी केन्‍द्र, स्‍वीडन के सहयोग से कार्य करता है।

стихи русских классиков о женщине उन्‍होंने कहा कि हमें जेनरिक औषधियों को बढ़ावा देना जारी रखने की आवश्‍यकता है। हालांकि आज हमें इस बात को दोबारा सुनिश्चित करने की जरूरत है कि ये उच्‍च गुणवत्‍ता और प्रभाव वाली औषधियां हैं। हम एकमात्र इसी तरीके से ऐसी दवाओं तक सुलभता बढ़ा सकते हैं। श्री नड्डा ने कहा कि भारत देश भर में निशुल्‍क औषधि पहल लागू करने की भी प्रक्रिया में है, ताकि जो लोग दवा खरीदने में सक्षम नहीं हैं, वे भी उच्‍च गुणवत्‍ता वाली औषधियां प्राप्‍त कर सकें।

где находится машина инфернусв гта 4 इस अवसर पर सचिव, स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण श्री बी. पी. शर्मा ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि चिकित्‍सा क्षेत्र और सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य प्रणालियों में कई चुनौतियां हैं और उन्‍होंने फार्माकोविजिलेंस की आवश्‍यकता को उजागर किया है, मसलन ऐसे देशों से दवाइयां मंगवाना, जहां विनियामक मापदंड ज्‍यादा मजबूत नहीं हैं, चिकित्‍सकीय मार्गदर्शन के लिए ऑनलाइन प्‍लेटफॉर्म्‍स पर लोगों की निर्भरता बढ़़ना और स्‍व चिकित्‍सा आदि। उन्‍होंने कहा कि भोजन, दवाओं और पूरक आहारों के बीच सीमाएं धुंधली पड़ती जा रही हैं। इतना ही नहीं, नयी प्रौद्योगिकियों और चिकित्‍सा उपकरणों के लिए विनियामक ढांचे की जरूरत है। ऐसी स्थिति में, सशक्‍त फार्माकोविजिलेंस की जरूरत बढ़ चुकी है।

सचिव, स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण, ने पीसीवी को फार्मेसी के पाठ्यक्रम का भाग बनाने, प्रशिक्षण के माध्‍यम से फील्‍ड वर्कर्स का कौशल बढ़ाने और उपलब्‍ध आंकड़ों/सूचना प्रणाली के बारे में उपभोक्‍ताओं को शिक्षित करने के लिए सशक्‍त आईईसी प्रयासों की जरूरत पर प्रकाश डाला।

इस बैठक का आयोजन हर साल डब्‍ल्‍यूएचओ के किसी एक सदस्‍य देश द्वारा किया जाता है। राष्‍ट्रीय फार्माकोविजिलेंस केंद्रों की सालाना बैठक देशों के लिए फार्माकोविजिलेंस के वर्तमान मामलों और चिंताओं पर विचार-विमर्श करने के लिए एक मंच का कार्य करती है। इस बैठक में 57 देशों के 150 से ज्‍यादा अंतर्राष्‍ट्रीय प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

इस अवसर पर डॉक्‍टर जगदीश प्रसाद, डीजीएचएस और स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय के अन्‍य वरिष्‍ठ अधिकारी, रेगुलेशन मेडिसिन्‍स एंड अदर हैल्‍थ टैक्‍नोलॉजीस के अध्‍यक्ष डॉक्‍टर लेम्बित रागो, अनिवार्य औषधि एवं स्‍वास्‍थ्‍य उत्‍पाद (ईएमपी), डब्‍ल्‍यू एच ओ मुख्‍यालय, डॉ. क्‍लाइव ओंदारी, समन्‍वयक, औषधि सुरक्षा एवं सर्तकता, डब्‍ल्‍यू एच ओ मुख्‍यालय, डॉ. शांति पाल, ग्रुप लीड, औषधि सुरक्षा एवं सर्तकता, डब्‍ल्‍यू एच ओ मुख्‍यालय, और सुश्री प्रकिन सचखाया, समन्‍वयक स्‍वास्‍थ्‍य कार्यक्रम, डब्‍ल्‍यू एच ओ कंट्री भी उपस्थित थे।

Source – PIB

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