कांवरियों की पोशाकें सिलने के इस काम में हमें रूहानी जुड़ाव महसूस होता है : मो. कलीम

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kaleem

पूरे सावन मास में कांवरियों के लिए कपड़े सिलने वाले मो. कलीम कहते हैं “हमें ऐसा लगता जैसे इस काम से हमारा कोई रूहानी जुड़ाव है |”

गोरखपुर का एक मुस्लिम परिवार जो पिछले 13 वर्षों से पूरे सावन माह कांवरियों के लिए केसरिया रंग के कपड़े और बैग सिलता है, कलीम चाचा बताते हैं “यह सब करीब 13 साल पहले शुरू हुआ मै अपने घर के बहार वाले कमरे में बैठा था जिसमे मै अपना दर्जी का काम करता हूँ तभी एक कांवरिया मेरे पास भगवा रंग का कपडा लेकर आया और उसके लिए एक पोशाक और एक बैग बनाने को कहा, मैंने उससे कपड़ा लिया और दुसरे दिन सुबह आने को कहा पर जब मैंने उससे पैसे मांगे तो वह बोला कि मै उससे कुछ काम करवा लूँ क्योंकि उसके पास देने के लिए पैसे नहीं हैं, मै समझ गया कि वह पैसे नहीं दे पायेगा तो मैंने उसे बिना पैसों के ही पोशाक बना कर देदी |

मै एकदम आश्चर्यचकित हो गया, जब वह अगले दिन मेरे पास दर्जनों कावरियों को लेकर आया और उन सबने मुझे उनकी पोशाकें सिलने का काम और उस काम के पैसे दिए, उस दिन से आजतक मै पूरे सावन मास में कांवरियों के लिए पोशाकें और बैग सिलता हूँ, अब तो कई और मुस्लिम परिवारों ने भी इस काम की शुरुवात कर दी है |
मुझे इस काम में एक रूहानी एहसास होता है, यह काम मुझे अल्लाह का तोहफा है क्योकि मैंने कांवरियों के लिए पोशाकें बना – बना कर अच्छा  मुनाफा कमाया है और अब मेरी माली हालत भी पहले से बेहतर हो गयी है, कांवरियों के लिए पोशाकें बनाने में मुझे बड़ा सुकून मिलता है और मै मेरे पास आने वाले सभी श्रद्धालुओं से कहता हूँ की मेरे लिए भी दुआ करें ताकि मै भी हज़ के लिए जा सकूँ |

गुजरते सालों के साथ लोग मेरे घर को कांवरियों की पोशाकों और अन्य सामानों के लिए सबसे बेहतर जगह के तौर पर जानने लगे हैं |

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Source – TOI

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