एयरपोर्ट के लिए भूमि को लेकर बनी है असमंजस की स्थिति

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जौलीग्रांट : एयरपोर्ट प्रशासन ने भले ही एयरपोर्ट को अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट बनाने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। लेकिन एयरपोर्ट विस्तारीकरण का प्रस्ताव अभी तक हवा में ही लटका हुआ है।

नए मास्टर प्लान में एयरपोर्ट को लंबाई में रानीपोखरी की तरफ चौडाई में जौलीग्रांट और अठुरवाला की तरफ बढाया जाना प्रस्तावित है। जिसमें ज्यादातर भूमि थानों वन रेंज से ली जानी है। नए मास्टर प्लान में लगभग 256.27 एकड़ भूमि एयरपोर्ट को लेनी है। लेकिन मजेदार बात ये है कि एयरपोर्ट ने अभी तक फॉरेस्ट लैंड का प्रस्ताव वन विभाग को भेजा ही नहीं है।

प्राईवेट लैंड ट्रांसफर की भी अभी तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है। मतलब साफ है कि जब एयरपोर्ट के पास जमीन ही नहीं है। तो अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट क्या हवा में बनेगा।

भारत सरकार से मिलनी है अनुमति

एयरपोर्ट जिस वन भूमि पर एयरपोर्ट का विस्तार करना चाहता है। वो भूमि रिजर्व फॉरेस्ट है। जिसमें कई दुलर्भ प्रजातियों के वन्य जीव रहते हैं। एयरपोर्ट के लिए वन भूमि का प्रस्ताव पहले वन विभाग को जाएगा फिर राज्य सरकार से होते हुए भारत सरकार को जाएगा। जिसके बाद मंजूरी के बाद ही लैंड ट्रांसफर की कार्यवाही की जाएगी।

एयरपोर्ट के लिए मार्ग निर्माण पर लगी रोक

थानों वन रेंज में भूमिया मंदिर से लेकर एयरपोर्ट टर्मिनल के पास तक निर्माणाधीन एयरपोर्ट मार्ग को वन विभाग ने रूकवा दिया है। वन विभाग का साफ कहना है कि रिजर्व फॉरेस्ट में मार्ग निर्माण से वन्य जीव प्रभावित होंगे। इसलिए 55 नंबर वन बैरियर से लेकर भूमिया मंदिर तक 900 मीटर फ्लाई ओवर के निर्माण के बाद ही इस मार्ग को पूरा किया जा सकेगा।

मामले में प्रशन्न कुमार पात्रो ने कहा कि एयरपोर्ट की तरफ से वन भूमि से संबधित कोई भी प्रस्ताव वन विभाग को नहीं मिला है। प्रस्ताव मिलने के बाद ही कुछ कहा जाएगा  |

रिपोर्ट – मोहम्मद शादाब

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