अवैध स्कूलों का भरमार यही बन गया है आजकल बालोद जिला का पहचान जिला शिक्षा अधिकारी है मौन

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  बालोद (ब्यूरो)- पिछले सत्र बोर्ड परीक्षा में बालोद जिला छत्तीसगढ़ में एक अलग स्थान बनाया हुआ था परंतु इस साल नतीजन अच्छा नहीं रहा कुछ पलकों का मानना है इन सब के पीछे अवैध रूप से संचालित हो रही स्कूल है क्योंकि अगर अवैध रूप से स्कूल संचालित है तो निश्चित ही कमाई का जरिया समझकर काम कर रहे हैं वैसे तो प्रदेश भर में पौने चार सौ अवैध स्कूल संचालित बिना मान्यता के चल रहे निजी स्कूलों पर सरकार व विभाग मेहरबान, कई शिकायतों के बावजूद भी तीन सालों से चल रहा ।

छत्तीसगढ़ शिक्षा का अधिकार कानून वर्ष 2010 से प्रदेश में प्रभावशाली है, लेकिन इसका असर जिला बालोद में देखने को नहीं मिल रहा है। जिले में कईअवैध निजी स्कूलों का संचालन बिना रोक-टोक के हो रहा है जिसमें से लगभग कई स्कूल तो बालोद शहर में ही संचालित हो रहा है। हर गली-मोहल्ला में छोटे-छोटे कमरों में स्कूलों का संचालन कर पालकों को खुलेआम लूटने वालों पर जिला शिक्षा विभाग इस कदर मेरहबान है कि कई सालों से बिना मान्यता के चल रहे स्कूल की कई शिकायतों के बाद भी आजतक कारवाई नहीं की गई है।

हालांकि प्रदेश भर में इस तरह के लगभग तीन सौ सत्तर स्कूल वर्ष 2017-18 तक में विगत सात सालों से अनवरत रूप से संचालित हो रहे, इनमें से अधिकांश के खिलाफ विभाग, कलेक्टर और सचिव तक शिकायतें पहुंची किंतु किसी भी स्कूलों पर कारवाई नहीं  हुई। सबसे हैरानी का विषय है कि इस तरह के बिना मान्यता वाले अवैध प्राइवेट स्कूलों के संचालकगण प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सत्ताधारी दल के मंत्री, संत्री व संगठन के बेहद करीबी हैं।

इस तरह  मुख्यमंत्री के कार्य, पैतृक व विस क्षेत्र में ही पच्चीस अवैध स्कूल संचालित, शिकायतें कई बार मगर कारवाई नहीं,राजनांदगांव मुख्यमंत्री व पुत्र सांसद का कार्यक्षेत्र है, तो वहीं कवर्धा मुख्यमंत्री का पैतृक व विधानसभा क्षेत्र हैं किंतु कवर्धा शहरीय क्षेत्र में लगभग ग्यारह स्कूल बिना मान्यता के चल रहे जिसमें से दो स्कूल नामी है और इनके  संचालक मुख्यमंत्री के करीबी है। राजधानी रायपुर में तो तकरीबन पैंतालीस स्कूल, जिनमें से सत्रह स्कूलों के संचालक सत्तासीन दल के मंत्रियों के बेहद करीबी और खासमखास है।

ऐसा ही हाल बिलासपुर में भी है यहां पर सत्ताइस स्कूल अवैध रूप से विगत सात सालों से संचालित हो रहे। रायगढ़, धमतरी, मुंगेली, दुर्ग भिलाई, बेमेतरा आदि में भी सात या आठ स्कूल बिना मान्यता के चल रहें। इनमें से कई तो नामी गिरामी स्कूल हैं। अब प्रदेश सरकार का क्या कहना शिक्षा जैसी संस्थान को आज व्यसायिक रूप से इस्तेमाल कर रहा है करने दे रहा है यह बहुत बड़ी बात है क्योंकि कहा जाता है राष्ट्र के निर्माण में शिक्षा बहुत मायने रखता है परंतु अभी छत्तीसगढ़ में बालोद जिला में इनका मतलब समझ से परे हैं l

रिपोर्ट- खिलौना चंद्राकर/हरदीप छाबड़ा

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