सरकारें आई और गयी पर सालों से बिजली की राह देख रहे इस गाँव में बिजली ना आ सकी

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हसनगंज-उन्नाव : जहां एक ओर सरकार की मंसा है की कोई भी ग्राम विधुत की से अछूता न रहे हर गाँव रौशन हो, वहीँ हसनगंज विकास खंड के एक ग्राम के लोगों के लिए बिजली जलाना, टेलीविजन चलाना, एक सपना बना हुआ है, लोगो को मजबुरीवश चिराग, लालटेन की रौशनी में जीवन यापन करना पड़ रहा है कैसे यहां के बच्चे चिराग की रौशनी में पढाई करते है उनका भविष्य चिराग की रौशनी में कैसे उज्जवल होगा।

हसनगंज विकास खंड के ग्राम मटेरिया के लख़नऊ और उन्नाव की सीमा पर स्थित बाराती खेड़ा मजरा मटेरिया है, जहाँ लगभग 1200 से अधिक की जनसंख्या निवास करती है और लगभग 550 मतदाता मतदान करते है लेकिन इन मतदाताओं को को केवल ठगा ही जाता है ये लोग हर चुनाव में बिजली की आशा लेकर प्रत्यासियों को बहुमत दिलाकर जिताते है ।और प्रत्यासी भी इनको बिजली का लालच दे कर वोट मांगते है ग्रामीण इस आशा में वोट देते है की इस बार हमको भी बिजली मिलेगी इस बार हमारे घर में भी बल्व जलेगा लेकिन सरकार बनने के बाद उनकी आशाओ पर पानी का समुन्दर डाल दिया जाता है दलितों के उत्थान करने का दम भरने वाली बसपा सरकार वर्ष 2007 से 2012 में बसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार रही और वर्ष 2012से 2017 तक सपा की पूर्ण बहुमत की सरकार रही लेकिन दलितों के इस गाँव बाराती खेड़ा को बिजली की सौगात तक न मिली इन सरकारो के नेता सिर्फ लॉलीपॉप दिखा कर वोट बटोरते रहे है ग्रामीण बेचारे मोबाइल चार्ज करने के लिए सोलर पैनल व् बैट्री का का सहारा लेते है बाराती खेड़ा निवासी अशोक , विशाल आदि ने बताया की यहां बिजली न होने के कारन रिश्तेदार भी यहां आने में कतराते है और हम लोगो को शर्मशार होना पड़ता है।

ग्राम प्रधान जयविंद ने बताया की अधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री की चौखट तक रौशनी के लिए गुहार लगाईं पिछले दो साल पहले खम्बे जरूर आ गए थे लेकिन उनको खड़ा करने के लिए सरकार का कोई भी नुमाइंदा दलित बस्ती में झाँकने तक नही आया ।

रिपोर्ट – राहुल राठौर

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