गंगा अवतरण के उपलक्ष्य में हज़ारों ने गंगा में लगायी डुबकी

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बांगरमऊ/उन्नाव(ब्यूरो)- पृथ्वी पर गंगा अवतरण के उपलक्ष्य में मनाए जाने वाले गंगा दशहरा के अवसर पर आज तहसील क्षेत्र के विभिन्न घाटों पर पहुंचकर आज हजारों लोगों ने गंगा में डुबकी लगाई और पुण्य के भागीदार बने। इन मेलों में सुरक्षा के नाम पर पुलिस के एक दो सिपाही ही दिखाई दिए ।

बताते चलें कि अपनें साठ हजार परिवारी सदस्यों जो कि कपिल मुनि के श्राप से भष्म हो गए थे , को मोक्ष दिलाने के लिए राजा भागीरथ ने गंगा जी को पृथ्वी पर लाने के लिए पहले ब्रह्माजी को कठिन तपस्या कर खुश किया तो ब्रह्मा जी ने प्रसन्न होकर उन्हें बताया कि गंगा को हम छोड़ तो देंगे लेकिन पृथ्वी पर गंगा के वेग को कौन रोक सकता है? इसके लिए आपको शिव की आराधना करनी पड़ेगी| यदि भगवान शिव गंगा को रोकने के लिए राजी हो जाएंगे तो हमें गंगा को पृथ्वी पर भेजने में कोई आपत्ति नहीं है। तब राजा भगीरथ ने भगवान् शंकर को कठिन तपस्या कर प्रसन्न किया और गंगा के बेग को रोकने पर राजी हो गए। तब ब्रम्हा जी ने गंगा को पृथ्वी पर जानें के लिए छोड़ दिया। छोड़ी गई गंगा को भगवान शिव ने अपनी जटा में समाहित कर लिया और पृथ्वी पर गंगा को भेजने के लिए अपने जटा की एक लट खोल दी। जिससे गंगाजी धरती पर प्रवाहित होने लगी और जिधर जिधर राजा भागीरथ गए उनके पीछे-पीछे गंगा मां आती रही और राजा भागीरथ गंगा जी को कपिल मुनि के आश्रम ले गए। जहां उनके साठ हजार सदस्यों की आत्माएं भटक रही थी। उन को मुक्ति दिलाई तभी से उस जेष्ठ माह की दसवीं तिथि से गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता है।

आज तहसील क्षेत्र के नानामऊ घाट सरैया घाट, सेंगघाट, बंदी माता घाट आदि जगहों पर गंगा मेला का आयोजन किया गया और इन पर आज हजारों भक्तों ने पहुंचकर गंगा स्नान किया और पूण्य के भागीदार बने। इन मेलों में सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर पुलिस की व्यवस्था नगण्य रही और जेबकतरे और ठग भी सक्रिय रहे। नानामऊ में कई लोगों की जेब काट कर लोगों ने उनकी नगदी साफ कर दी। वहां मौजूद पुलिस बल ने उन पीड़ितों की समस्या सुनने के बजाय उन्हें ही अपनी सुरक्षा करने का पाठ पढ़ा कर वापस कर दिया।

रिपोर्ट- रघुनाथ प्रसाद

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