नृत्य , नाटक , गीत के माध्यम से मंगल पाण्डे , कुंवर सिंह , झांसी की रानी की गाथा बताई ।

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बलिया (ब्यूरो)- 1857 प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की 160वीं बरसी पर  बलिदानी बलिया ने किया अमर शहीदों को याद। आजादी की चिनगारी को सुलगाने वाले मंगल पाण्डे की जन्मभूमि ने शहीदों के सम्मान में जिले को स्वच्छ बनाने का किया संकल्प।

संस्कृति विभाग उ0प्र0 द्वारा 10 मई को जिले के ऐतिहासिक क्रातिमैदान (टाउनहाल) के बापू भवन में आयोजित जरा याद करों कुर्बानी कार्यक्रम का शुभारम्भ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पं0 महानन्द मिश्र की जीवन संगिनी श्रीमती राधिका मिश्रा एवं नगर विधायक आनंद स्वरुप शुक्ल ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

कार्यक्रम संयोजक शिवकुमार सिंह कौशिकेय ने विषय प्रवर्तन करते हुए बताया कि भारत में पांव पसार रही ईस्ट इण्डिया कम्पनी सरकार के विरुद्ध सामूहिक रूप से बगावत का बिगुल बजाने की तारीख तात्या टोपे, सदाशिवराव, रहमत उल्ला खाॅन, सीताराम कुॅवर, रानी लक्ष्मीबाई, वीरवर कुॅवर सिंह आदि योजनाकारों ने 10 मई तय किया था। किन्तु बलिया के लाल मंगल पाण्डेय ने 29 मार्च को ही बैरकपुर छावनी में दो अंग्रेज फौजी अफसरों को मारकर बगावत के बारुद में चिंगारी सुलगा दिया।

यद्यपि की रणनीतिकारों ने अपनी योजना बदल दिया था, बावजूद इसके मेरठ और दिल्ली में सैनिकों ने कम्पनी सरकार के खिलाफ विद्रोह कर दिया था। जिसके कारण ब्रिटिश सरकार ने ईस्ट इण्डिया कम्पनी के हाथों से भारत की सत्ता छीनकर अपने हाथ में ले लिया था।

10 मई 1984 भारत सरकार ने अमर शहीद मंगल पाण्डे के सम्मान में डाक टिकट जारी किया था। 10 मई को ही चित्तू पाण्डे जी का जन्मदिवस भी है। संस्कृति विभाग स्वराज को सुराज की ओर ले जाने वाले मनीषी पं0 दीन दयाल उपाध्याय की स्मृति में सौ दिनों की अपनी कार्ययोजना को देश के अमर हुतात्माओं को स्मरण करके कर रहा है, इसके लिए बलिया जिले का चयन किया ।

विधायक आनंद स्वरुप शुक्ल ने अपने संबोधन में कहा कि हमारा अतीत गौरवशाली रहा है, हमें वर्तमान में अपने कर्तव्यों को निष्ठापूर्वक निभाकर भविष्य को सुन्दर बनाना है।

जिलाधिकारी गोविन्द राजू एनएस ने स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि हम अपने शहीदों सेनानियों को सच्ची श्रद्धांजली तभी दे सकते है, जब हम उनके जीवन के आदर्शो को अपने जीवन में उतारें। हमारे पूर्वजों का सपना था कि स्वराज मिलने पर हम स्वस्थ, समृद्ध बनेंगें।

स्वस्थ रहने के लिए स्वच्छ रहना आवश्यक है, इस जनपद ने संकल्प लिया है कि हम दिसम्बर तक जिले को खुले में शौच से मुक्त जिला बनायेगें।

सांस्कृतिक कार्यक्रम का आगाज राष्ट्रीय कथक संस्थान लखनऊ की प्रस्तुति सन् सत्तावन की क्रांति की नृत्य नाटिका से हुआ। जिसे विकास पाण्डेय, हुमा साहू, उपासना श्रीवास्तव, आकृति भारद्वाज, काव्या, प्रियंका, सुमित, देवांशी, प्रीति, मोनिका, गोविन्द, अविनाश, सिद्धार्थ आदि कलाकारों ने सरीता श्रीवास्तव एवं असीम भट्टाचार्या के नेतृत्व में जीवन्त रुप में प्रस्तुत किया।

शहीद मंगल पाण्डे के विद्रोह को अभय सिंह कुशवाहा के निर्देशन में समीर, आयुष, छोटेलाल सुमंत, नितेश, राहुल, जीतेन्द्र, पवन, कौशल शुक्ल, प्रिती ने अपने नाटक के माध्यम से शानदार तरीके से प्रस्तुत किया।

लोक गायक शैलेन्द्र मिश्र देशभक्ति और पारम्परिक गीतों से देर रात तक दर्शकों को बाॅधे रखा। संचालक विजय बहादुर सिंह के ओजस्वी काव्यों ने बार-बार लोगों को ताली बजाने को विवश किया।

कार्यक्रम में नगर मजिस्ट्रेट राम गोपाल सिंह, संस्कृति विभाग उ0प्र0 के कार्यक्रम अधिकारी रमेश कुमार, डाॅ0 जनार्दन राय, त्रिभुवन सिंह प्रीतम, अशोक सिंह, अशोक पाठक सहित अनेक गणमान्य लोगों की उपस्थिति रही।

रिपोर्ट-सन्तोष कुमार शर्मा

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