गुजरात नगर निगम चुनावों में टिकट बटवारे को लेकर असमंजस में बीजेपी |

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amit shah

गुजरातके नगर निगम और पंचायती चुनावो में टिकटके बटवारे को लेकर भाजपा अभी असमंजस में दिखाई दे रही है वही ओबीसी और पाटीदारो ने भी चुनाव को ध्यान में रखते हुए सरकार को घेरने के लिए अपनी अपनी और से गतिविधिया तेज कर दी है, गुजरात में पाटीदार और ओबीसी दोनों समुदाय बहुमत में है जिनके वोट का हेरफेर सरकार को बनने और बिगड़ने में बहुत अहम भूमिका अदा कर सकता है.
तभी पाटीदारो के संगठन सरदार पटेल ग्रुप ने दूसरी सवर्ण जातियों भी समर्थन हासिल करने की मुहीम शुरू की है जिसमे भाजपा की ही स्टाइल अख्तियार की गई है. एसपीजी द्वारा एक नंबर दिया गया है जिसके ऊपर मिसकॉल करने से आपकी सदस्यता रजिस्टर हो जाएगी और आप अगर पाटीदार नहीं हो तो भी आप बिन अनमत की श्रेणीमे आने वाली जाती से हो और आप अनमत आंदोलन को समर्थन जाहिर कर
रहे हो यह गिना जाएगा. एसपीजी गुजरात मे एक करोड़ सवर्णो का समर्थन हासिल करने की मुहीम की शुरुआत कर चुका है, पाटीदारो ने पहले से ही NOTA का उपयोग करने की धमकी दे रखी है उसके कारण सरकार की चिंताऐ बढ़ी हुई है भाजपा कीवोट बैंक मानी जाने वाली गुजरात की सवर्ण जातियो का भी समर्थन मांगने पाटीदार आंदोलन के नेताओं ने कोशिशे तेज कर दी है जिसकी वजह से सरकार और
भाजपा के नेताओ की नींद हराम हो गई है |

आनन फानन में सरकार ने 50 पाटीदार नेताओं के खिलाफ एक और केस दर्ज कर दिया है. सरकार आंदोलन को दबानेके लिए पोलिस केस का सहारा ले रही है वही आंदोलनकारी अपनी रणनीतिओ के आगेबढ़ाते जा रहे हैं, और सवर्ण अनामत मंच का गठन कर चुके है, साथ में पाटीदार अनमत आंदोलन के संयोजक यह भी कह चुके है की उनका इरादा ओबीसी को मिल रही अनामत में से हिस्सा लेना नहीं है पर सवर्णो को अनमत नहीं मिल रही है उसकी वजह से उनका विकास अटक जाता है. इसलिए यह आंदोलन किसी जाती के खिलाफ है यह न समझा जाए. आरक्षण आर्थिक आधार पर होना चाहिए नहीं के जातीके आधार पर ऐसी भी बात आरक्षण के मंच से उठ रही है |

तो वही ओबीसी मंच के अग्रणिओ ने इस चुनावमे 78% टिकट ओबीसी के प्रत्याशिओको दी जाए एईसी भाजपासे मांग की है गुजरातमें 78% ओबीसी जातियों की आबादी है वह अगर पाटीदार आंदोलन के चलते अगर दबाव में आकर कही भाजपा द्वारा पाटीदारो को ज्यादा टिकट दी गई और ओबीसी जातियों के साथ अगर अन्याय किया गया तो उसका खामियाजा पार्टी को भी भुगतना पड़ेगा. ओबीसी मंच के अल्पेश ठाकोर का कहना हे की ओबीसी मत इतने सस्ते नहीं है की कोई भी पार्टी उसे वोटबैंक ते तोर पर इस्तेमाल करे. ओबीसी किसके साथ जाएगा यह हम 15 तारीख को जाहिर करेंगे. अगर भाजपा 78% टिकट ओबीसी समाज को ना देकर कोई अन्य समाज के दबाव में काम करती है तो और कांग्रेस अगर ओबीसी के हित की बात करती है तो हम अपना विकल्प बदल भी सकते है. हम उसी पार्टी को साथ देंगे जो पार्टी हमारे समाज के हित की बात करेगी. जिस पार्टी को हमारे वोट चाहिए, उस पार्टी को अपने मेनिफेस्टो में वह बात सामने रखनी पड़ेगी तभी हम किसीनतीजे पर पहुंचेंगे ऐसा ओबीसी मंच ने ऐलान किया है |

दोनों ओर से अपनी अपनी बात को मनवाने के लिए मुद्दे सामने रखे जा रहे है तो अब गुजरातकी दोनों प्रमुख पार्टियों को उम्मीदवारों का चयन करना एक जोखिम भरा काम लग रहा है तभी भाजपा ने रणनीति बनायीं है की उम्मीदवारों को सूची आम न कर जिस उम्मीदवार को टिकट देना है उसे कह दिया जाए और वह जाकरमेंडेट के आधार पर पार्टी के सिम्बोल के लिए चुनाव का फॉर्म भर के आये, परन्तु भाजपा जैसी बड़ी पार्टी गुपचुप उम्मीदवरो से फॉर्म भरवाने को मजबूर है यह उसकी शाख बिगड़ने वाली बात है, भाजपा के आंतरिक गलियारो मे यह चर्चा भी
सुनाई पड़ रही है |

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