घटिया निर्माण सामग्री से निर्मित शौचालय बन सकते हैं किसी की कब्रगाह

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महाराजगंज/रायबरेली(ब्यूरो)- स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में बनने वाले शौचालय महज एक औपचारिकता साबित हो रहे हैं । जहां ₹12000 की प्रोत्साहन राशि की सरकारी मदद से बनने वाले यह शौचालय ज्यादातर ठेकेदारी प्रथा के तहत बनते दिखायी दे रहे हैं वहीं इनमें कहीं ना कहीं घटिया निर्माण सामग्री का जमकर प्रयोग हो रहा है और निर्माण के बाद यह शौचालय जर्जर होने के चलते उपयोग नहीं किये जा रहे हैं । जिससे कि यह शौचालय महज एक औपचारिकता साबित हो रहे हैं । इससे पूर्व भी ग्रामीण क्षेत्रों में इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत बने शौचालयों की बात की जाय तो आज इनमें एक प्रतिशत शौचालय भी उपयोग में नहीं है ।

वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में 12000 की प्रोत्साहन राशि से बनने वाले शौचालय ठेकेदारी प्रथा के चलते अभी से ही इतने जर्जर हैं कि कब ये भरभरा कर गिर जाय और कब किसकी कब्रगाह बन जाय किसी को कुछ अनुमान नही है । ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय बनने के बावजूद भी ग्रामीण अभी भी शौच के लिये खुले में जाते हैं इनका कहना है कि प्रधानों द्वारा ठेकेदारों से बनवाया गया शौचालय इतना जर्जर है कि वह कभी भी गिर सकता है । प्रधानमंत्री का स्वच्छ भारत अभियान के अन्तर्गत यह सपना है कि वर्ष 2019 तक भारत को पूर्ण रूप से स्वच्छ बनाया जाय ।

जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों को बाह्य शौच मुक्त बनाने हेतु विशेष प्रोत्साहन राशि की भी व्यवस्था की गई है । जिससे कि ग्रामीण क्षेत्रों को बाह्य शौच मुक्त बनाया जा सके लेकिन भ्रष्टाचार और कमीशन खोरी के चलते स्वच्छ भारत अभियान अपनी गति को पकड़ने में असफल साबित होता प्रतीत हो रहा है । प्रोत्साहन राशि से बनने वाले ये शौचालय का उपयोग वास्तव में शौचालय से अधिक लोग उपले व लकड़ियां रखने में कर रहे हैं । जिससे यह मिशन अपने लक्ष्य को प्राप्त करने से पहले ही धराशायी हो गया है ।

रिपोर्ट-विनय सिंह चौहान

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