देश के 10 ऐसे वैज्ञानिक जिन्होंने बदल दी देश की सूरत

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विज्ञान एक ऐसा शब्द जिसके ऊपर आज के समूचे संसार की आधारशिला रखी हुई है I आज दुनिया का हर देश या फिर कहें तो हर ब्यक्ति सबसे अधिक विज्ञान के समीप ही जाना चाहता है, क्योंकि दुनिया का मानना है कि विकास विज्ञान के माध्यम से ही संभव है I शायद, वह लोग सच ही कहते है I आज हम आपको भारत के उन ऐसे 10 वैज्ञानिकों के बारे में बताने जा रहे है जिन्होंने पूरे भारत की काया-कल्प ही बदल के रख दी और विश्व पटल के सामने समय-समय पर एक नए और युवा भारत को प्रदर्शित करते रहे और दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते रहे –

सीवी रमन - डाक्टर सी.वी. रमन के बारे में कुछ और जानने से पहले हम आपको इतना अवश्य बताना चाहेंगे कि यह दुनिया के पहले अश्वेत वैज्ञानिक थे और इसके अलावा यह शायद ही दुनिया के पहले ऐसे वैज्ञानिक थे जो काम कामर्स के क्षेत्र में करते थे लेकिन खोज इन्होने भौतिकी के क्षेत्र में की थी I डाक्टर रमन को पूरी दुनिया में रमन इफेक्ट के लिए हमेशा याद किया जाएगा I इन्हें वर्ष 1930 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था I इन्हें यह पुरस्कार भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया गया था I आपको ज्ञात ही होगा कि डाक्टर सी. वी. रमन ने प्रकाश के ऊपर सबसे अधिक और सर्वप्रथम अध्ययन किया था I उनके द्वारा किये गए अविष्कार को आज भी पूरी दुनिया रमन-किरण के नाम से जानती है और उनके उसके प्रभाव को रामन प्रभाव यानि रमन इफेक्ट के नाम से जाना जता है I जिसका प्रयोग स्पेक्ट्रम पदार्थों को पहचानने और उनकी अन्तरंग परमाणु योजना का ज्ञान प्राप्त करने का महत्वापूर्ण साधन के रूप में जाना गया। रमन को 1954 ई. में भारत रत्न दिया गया जबकि 1957 में लेनिन शान्ति पुरस्कार प्रदान किया।
डॉ. जगदीश चंद्र बोस - (30 नवंबर, 1858 – 23 नवंबर, 1937) डॉ. जगदीशचंद्र बोस दुनिया के पहले वैज्ञानिक है जिन्होंने एक ही साथ विज्ञान की तीन शाखाओं पर काम किया I जगदीशचंद्र बोस को सर बोस भी कहा जाता है I विज्ञान के क्षेत्र से हटकर या फिर कहें तो विज्ञान चौथे स्वरुप पुरातत्व विज्ञान का भी इन्होने गहन अध्ययन किया हुआ था I ये दुनिया के पहले ऐसे वैज्ञानिक थे जिन्होंहने रेडियो और सूक्ष्म तरंगों की प्रकाशिकी पर कार्य किया। आपको बता दें कि डाक्टर बोस ही भारत के पहले वैज्ञानिक थे जिन्हें अमेरिकी पेटेंट मिला था I आपको यह जानकर ख़ुशी होगी कि पूरी दुनिया में उन्हेंा रेडियो विज्ञान का पिता कहा जाता है।
डॉ. होमी जहांगीर भाभा – (30 अक्टूबर, 1909 - 24 जनवरी, 1966) जिस तरह से भारत में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को मिसाल मैंन कहा जाता है ठीक उसी प्रकार से डॉ. होमी जहांगीर भाभा के बिना भारतीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की कल्प ना भी नहीं की जा सकती थी । इन्हें 'आर्किटेक्ट ऑफ इंडियन एटॉमिक एनर्जी प्रोग्राम' भी कहा जाता है। इन्ही की बदौलत भारत ने वर्ष 1974 में ही देश का पहला परमाणु परीक्षण का डाला था I डाक्टर भाभा ने भारत को परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बनाने की योजना बनायी थी I लेकिन सबसे बड़ी आश्चर्य की बात यह है कि उन्होंने नाभिकीय विज्ञान में तब कार्य आरम्भ किया जब इसके बारे में ज्ञान न के बराबर था। जबकि उनकी नाभिकीय ऊर्जा से विद्युत उत्पादन की कल्पना को तो कोई मानने को तैयार नहीं था।
विक्रम साराभाई – (१२ अगस्त, १९१९- ३० दिसंबर, १९७१) विक्रम अंबालाल साराभाई भारत का शायद ही विज्ञान या फिर गैर विज्ञान क्षेत्र का कोई ब्यक्ति हो जो इस नाम से परिचित न हो, इसकी संभावना न के बराबर ही है I विक्रम साराभाई को डाक्टर कलाम के द्वारा भी याद किया जाता है I विक्रम साराभाई को भारतीय अन्तरिक्ष भाग का जनक भी कहा जाता है I भारत अन्तरिक्ष प्रोग्राम की स्थापना इन्होने ही की और इतना ही नहीं देश के भीतर तक़रीबन 40 या फिर इससे अधिक अंतरिक्ष और शोध संस्थानों की स्थापना भी इन्ही के द्वारा हुई I इन्होने आणविक ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य अनेक क्षेत्रों में भी बराबर का योगदान किया। गुजरात के अहमदाबाद से आने वाले सारा भाई पर तिरूवनंतपुरम में स्थापित थुम्बा इक्वेटोरियल रॉकेट लॉचिंग स्टेशन (टीईआरएलएस) और सम्बध्द अंतरिक्ष संस्थाओं का नाम बदल कर विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केन्द्र रख दिया गया। यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के एक प्रमुख अंतरिक्ष अनुसंधान केन्द्र के रूप में उभरा।
सत्येंीद्रनाथ बोस - (१ जनवरी १८९४ - ४ फ़रवरी १९७४) सत्येंेद्रनाथ बोस भारत के इस महान वैज्ञानिक के बारे में और इसकी महानता के बारे में हम सिर्फ और सिर्फ इस बात से ही अंदाजा लगा सकते है कि दुनिया की भौतिक शास्त्र में बोसान और फर्मियान नामक जिन दो अणुओं के बारे में हम पढ़ते है उनमें से बोसान इसी महान वैज्ञानिक के नाम पर रखा गया है I आपकी जानकारी के लिए यह बता देतें है कि भौतिक विज्ञान में दुनिया के सबसे महान वैज्ञानिक अल्बकर्ट आइंस्टा१इन के साथ मिलकर इन्होने बोस-आइंस्टीन स्टैटिस्टिक्स की खोज की थी ।
सुब्रमण्यकम चंद्रशेखर - (जन्म- 19 अक्तूबर, 1910 - मृत्यु- 21 अगस्त, 1995) सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर के बारे में कुछ भी कहने से पहले हम आपको यह बता देतें हैं कि सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर भारत के ही नहीं वरन दुनिया के पहले अश्वेत नोबेल पुरस्कार विजेता डाक्टर सी.वी.रमण के भतीजे थे जिन्हें भौतिकी के ही क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 1983 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था I सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर ने आकाश में एक स्वेत बौने नामक ग्रह की खोज की थी और आज भी इनके द्वारा खोजे गए उस ग्रह की दूरी को चंद्रशेखर सीमा के नाम से ही जाना जाता है I इन्होने खगोल भौतिक शास्त्र तथा सौरमंडल से संबंधित विषयों पर अनेक पुस्तकें लिखीं हैं।
डॉ. हरगोविंद खुराना – (जन्म: ९ जनवरी १९२२ मृत्यु ९ नवंबर २०११) डाक्टर हरगोबिंद खुराना का नाम लीये बगैर कभी भी दुनिया में चिकित्सा विज्ञान के बारे में कुछ भी कहना अधूरा ही रह जाता है I भारतीय मूल के इस वैज्ञानिक को चिकित्सा के क्षेत्र में इनके उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 1968 में दुनिया के सबसे प्रसिद्ध नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था I इन्होने आनुवांशिक कोड (डीएनए) की खोज की और उसकी व्याख्या भी की I हरगोबिंद खुराना ने मार्शल, निरेनबर्ग और रोबेर्ट होल्ले के साथ मिलकर चिकित्सा के क्षेत्र में काम किया। खुराना के इस अनुसंधान से चिकित्सा क्षेत्र को यह पता लगाने में मदद मिली कि कोशिका के आनुवंशिक कूट (कोड) को ले जाने वाले न्यूक्लिक अम्ल (एसिड) न्यूक्लिओटाइड्स कैसे कोशिका के प्रोटीन संश्लेषण (सिंथेसिस) को नियंत्रित करते हैं।
डाक्टर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम – (15 अक्टूबर 1931 - 27 जुलाई 2015) डाक्टर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम भारत के मिसाइल मैंन और भारत के पूर्व राष्ट्रपति और एक ऐसे नायक, एक ऐसे सहायक, एक ऐसे शिष्य, एक ऐसे राष्ट्रपति जिसका सम्पूर्ण जीवन बस कुछ जोड़ी कपड़ों में और कुछ किताबों, बच्चों के बीच ही गुजर गयी I डाक्टर कलाम का पूरा नाम अबुल पाकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम था I डाक्टर कलाम ने भारत को सर्वप्रथम गाइडड मिसाइल दी और इतना ही नहीं अन्तरिक्ष के क्षेत्र में भारत को स्थापित करने वाले भी डाक्टर कलाम ही थे I डाक्टर कलाम 1962 में भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो से जुड़े और उन्होंने प्रोजेक्ट मैनेजर के पद पर कार्य करते हुए पहला स्वदेशी उपग्रह एस.एल.वी.तृतीय छोड़ा I वर्ष 1980 में डाक्टर कलाम ने रोहिणी नामक उपग्रह को प्रथ्वी की कक्षा में स्थापित किया I और इसी भारत के लाल की बदौलत भारत को दुनिया के अन्तरिक्ष क्लब का सदस्य बनने का मौका मिला I इसरो मिसाइल लाँच व्हीकल को बनाने का काम भी इन्होने ही पूरा किया और इसके अलावा डाक्टर कलाम ने भारत को पृथ्वी, अग्नि और नाग जैसी मिसाइले भी दी I
जयंत विष्णुयनार्लीकर – (जन्म 19 जुलाई 1938) महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में जन्म लेने वाले इस महान वैज्ञानिक ने पूरी दुनिया में भौतिक विज्ञान पर खोज की है I पूरी दुनिया में आजकल सबसे अधिक चर्चा का विषय बनी बिग-बैंग थ्योरी जिसके द्वारा संसार यानि ब्रह्मांड की उत्पत्ति के बारे में जाना जा सकता है पर भी काम के लिए जाना जाता है I इन्होने इसी थ्योरी के जनक माने जाने वाले फ्रेड हॉयल के साथ मिलकर हॉयल-नार्लीकर सिधांत का प्रतिपादन भी किया I
वेंकटरामन रामकृष्णोन – (जन्म: १९५२, तमिलनाडु) वेंकटरामन रामकृष्ण न का जन्म तमिलनाडू के चिदंबरम जिले में हुआ था और भारतीय मूल के इस महान वैज्ञानिक को रसायनशास्त्र में इनके उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 2009 में नोबेल पुरष्कार से भी सम्मानित किया गया था I इन्हें यह पुरष्कार कोशिका के अंदर प्रोटीन का निर्माण करने वाले राइबोसोम की कार्यप्रणाली व संरचना के उत्कृष्ट अध्ययन के लिए दिया गया था।

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