केन्द्रीय श्रम संगठन की हड़ताल शुरू, करीब 15 करोड़ से भी अधिक श्रमिक हड़ताल पर…

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Image Courtesy – Indian Express

केन्द्रीय श्रम संगठन देशव्यापी हड़ताल का असर पूरे देश में देखने को मिल रहा है। इन हड़ताल में 10 केंद्रीय श्रम संगठनों के करीब 18 करोड़ करोड़ श्रमिकों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। सीटू का आरोप है कि मोदी सरकार श्रम कानूनों के रिफॉर्म्स की आड़ में इन कानूनों को और भी पूंजीपतियों के हित में बदलने जा रही है। सीटू की इस हड़ताल के चलते आज बैंक सेवाएं, टेलीकॉम और नागरिक यातायात सेवाएं प्रभावित रहने की उम्मीद जताई गई है।

सरकार ने ट्रेड यूनियंस हड़ताल न करने की अपील भी जारी की थी हालांकि इसका कोई असर नहीं हुआ। आगे हम आपको बता रहे हैं कि हड़ताल क्यों हुई और इससे या असर होग |

1. सबसे पहले बता दें कि ये हड़ताल होने का सबसे बड़ा कारण न्यूनतम मजदूरी है। ट्रेड यूनियन श्रमिकों के लिए इसे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। गौरतलब है कि हड़ताल को रोकने के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसे 246 से बढ़ाकर 350 रुपया प्रतिदिन करने का ऐलान भी किया था। लेकिन श्रमिक संगठनों की मांग है कि इसे कम से कम 18,000 प्रति माह किया जाए। इसके अलावा असंगठित क्षेत्र के लोगों समेत सभी श्रमिकों के लिए पेंशन कम से कम 3000 रुपया मासिक किया जाए।

2. ख़बरों के मुताबिक ट्रेड यूनियनों के आज भारत बंद के चलते ज्यादातर राज्यों में सरकारी बैंक और कार्यालय बंद हैं। वहीं केरल को छोड़कर अन्य सभी राज्यों में सार्वजनिक परिवहन की स्थिति सामान्य है। वहीं देश के ज्यादातर हिस्सों में स्कूल, कॉलेज और निजी बैंक खुले हैं। मुंबई और दिल्ली में बसें सामान्य रूप से चल रही हैं, वहीं बिजली और जलापूर्ति भी प्रभावित नहीं हुई हैं। कोल इंडिया के कर्मचारी भी इस हड़ताल में शामिल है। इस पर कोयला और ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि पॉवर प्‍लांटों के संचालन के लिए पर्याप्‍त कोयला है। अगर अगले 50 से 60 दिनों में भी खनन नहीं होता तो भी पावर प्‍लांट इससे प्रभावित नहीं होंगे। कोल इंडिया की स्थिति में आया बदलाव मोदी सरकार की प्रमुख सफलता रहा है। कंपनी इस समय इतना अधिक कोयला उत्‍पादन कर रही है कि पहली बार इसके निर्यात पर भी विचार किया जा रहा है।

3. ट्रेड यूनियन रेलवे और डिफेंस क्षेत्र में विदेशी निवेश में ढील देने के सरकार के फैसले के विरोध में हैं। यूनियंस का कहना है कि रेलवे, डिफेंस समेत सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में FDI के फैसले पर सरकार फिर से विचार करे। मौजूदा वित्‍तीय वर्ष में सरकार ने निजीकरण और कुछ कंपनियों को बंद करके करीब 55,907 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्‍य निर्धारित किया है। सरकार की ओर से संचालित 77 कंपनियों को घाटा बढ़कर 26, 700 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।

4. ट्रेड यूनियन सरकार से नई श्रमिक और निवेश नीतियों में बदलाव की भी मांग कर रहे हैं। इन संगठनों की आपत्ति बीमा और रक्षा जैसे क्षेत्रों में विदेशी निवेश के नियमों के शिथिल करने को लेकर है। घाटे में चल रहे सार्वजनिक उपक्रमों को बंद करने की योजना का भी श्रमिक संगठन विरोध कर रहे हैं। इसके आलावा श्रमिक संगठन कर्मचारियों की संख्या कम करने, कॉन्ट्रैक्ट पर काम देने, निजीकरण जैसी केंद्र की नीतियों का भी विरोध कर रहे हैं। रेडियोलॉजिस्‍टों और सरकारी अस्‍पतालों की नर्सों ने भी अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की है। हालांकि उन्होंने कहा है कि आपात सेवाएं प्रभावित नहीं होंगी।

5. बता दें कि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ट्रेड यूनियनों की हड़ताल का समर्थन कर रही है और यहां स्कूल-कॉलेज भी बंद हैं। यहां सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था भी प्रभावित हुई है और सड़कों पर बेहद कम बसें देखी जा रही हैं। ऑटो और टैक्सियां तो सामान्य ढंग से चल रही हैं, लेकिन आम दिनों से ज्यादा किराया वसूल रही हैं। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियंस कांग्रेस और सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस जैसे संगठनों ने हड़ताल नहीं करने की सरकार की ओर से मंगलवार को की गई अपील ठुकरा दिया था। इन संगठनों का कहना है कि सरकार उनकी मांगों को पूरा करने में नाकाम रही है। ट्रेड यूनियनों की हड़ताल को खत्‍म करने के प्रयासों के तहत वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को कहा था कि सरकार अपने कर्मचारियों का पिछले दो साल का बोनस जारी करेगी। इसके साथ अकुशल श्रमिकों के न्‍यूनतम वेतन में इजाफे की बात भी कही गई है।

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