केन्द्रीय ट्रेड यूनियन को नहीं लुभा सके जेटली, हड़ताल पर जाएगा यूनियन….

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arun jetley
आरएसएस की शाखा राष्ट्रिय मजदूर संघ को छोड़कर केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों ने शुक्रवार दो सितम्बर से देशव्यापी हड़ताल पर जाने का फैसला किया है, केंद्र सरकार के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने हड़ताल टालने के लिए कई बड़ी घोषणाएं की लेकिन इन घोषणाओं का कोई असर नहीं हुआ, इस हड़ताल को कांग्रेस और लेफ्ट से जुड़े ट्रेड यूनियनों का भी समर्थन हासिल है, और अब इस स्थिति ने भारतीय मजदूर संघ को दोराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है |

वित्त मंत्री ने हड़ताल को टालने के लिए गैरकृषि कार्य में से जुड़े मजदूरों की मजदूरी 246 रु. प्रतिदिन से बढाकर 350 रूपये प्रतिदिन करने की घोषणा की है लेकिन ट्रेड यूनियन की मांग है कि इन मजदूरों को प्रतिदिन 69२ रूपये के हिसाब से महीने का 18,000 रूपये मिले, इसके साथ ही ट्रेड यूनियन २ साल के बोनस की मांग कर रहा है |

31 मार्च 2015 के सरकारी डेटा के अनुसार केन्द्रीय क्षेत्रों में ठेके के मजदूरों की संख्या 19,03,170 थी जबकि राज्य में ठेके पर कम करने वाले मजदूरों की संख्या का पता नहीं है | यूनियन संघ के अनुसार यदि मजदूरों को 350 रूपये प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी मिलेगी तो उन्हें महीने ने 9100 रु. ही मिलेंगे जबकि सातवें पे कमीशन में न्यूनतम 18,000 रु. प्रतिमाह की सैलरी राखी गयी है और इस वजह से असामनता बढ़ रही और सरकार खुद भी असामनता की नीति को प्रोत्साहित कर रही है |

सरकार को सैलरी में विसंगतियों का कोई व्यापक और स्थाई उपाय निकालना होगा, मजदूरी को 246 रूपये से बढ़ाकर 350 रु. कर देने से समस्या हल नहीं होगी, मजदूरों के घरों में खर्च और कमाई काफासला दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है |

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