राजधानी में बदलते हैं कप्तान, लेकिन ट्रैफिक व्यवस्था नही

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delhi trafic jam
राजधानी की ध्वस्त ट्रैफिक व्यवस्था किसी से छिपी नही है, शासन और पुलिस के आला अधिकारी व्यवस्था में सुधार को बार बार पुलिस कप्तान बदलते है। नए कप्तान अपने रोबदार अंदाज में बैठकें और सड़क पर उतरकर सुधार के तमाम दावे करते है लेकिन नए कप्तानों के दावे चंद दिनों में हवाई हो जाते है।शहर की जनता और पर्यटकों को फिर उसी लचर व्यवस्था के कारण दुश्वारियों का सामना करना पड़ता है।

राजधानी में आज की सबसे बड़ी समस्या है ट्रैफिक जाम, लेकिन अभी तक तो सभी सरकार डब्लू डब्लू ऍफ़ की फाइट खेलने में लगी हैं। सरकार जी बहुत हुआ ये टी 20 का मैच अब तो जनता के बारे में सोचो |

क्या इन सड़कों को कोई वारिस मिल पायेगा?

देहरादूनअपनी खूबसूरत आबोहवा से दुनिया भर का ध्यान आकर्षित करने वाला शहर देहरादून अब बढ़ते ट्रैफिक का बोझ नहीं थाम पा रहा है। परिवहन विभाग और यातायात पुलिस से मिले आंकड़े बताते है कि दून की सड़कों पर हर साल औसतन साठ हजार नए वाहन उतर रहे है। जिससे राजधानी की सड़कें तो बोझिल हो ही रही है साथ ही वायु प्रदूषण भी अपने खतरनाक स्तर तक पहुँच रहा है।

राजधानी बनने के बाद से देहरादून मे बढ़ती वाहनों की संख्या के वावजूद सरकार ने सड़कों के चौड़ीकरण या नयी सड़कों को बनाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। जिसका परिणाम आम आदमी रोज दून की सड़कों पर फैले ट्रैफिक में फंस कर परेशान होता है। पुलिस की ओर से कई बार शासन को शहर में नए रुट बनाने का भी प्रस्ताव भेजा जा चुका है लेकिन शासन में बैठे अधिकारियों के कानो पर जूं तक नहीं रेंगती। प्रदूषण नियंत्रण विभाग के आंकड़ों के मुताबिक दून के कई ऐसे इलाके है है जहां बढ़ते ट्रैफिक के वजह से साँस लेना भी मुश्किल हो रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के मुताबिक वायु प्रदूषण के स्तर APQ 50-100 के बीच होना चाहिए लेकिन दून के कई इलाकों में ये आंकड़ा 400 को भी पार कर चुका है। लगातार बढ़ रहे प्रदूषण की वजह से अपनी ताज़ी हवा के लिए मशहूर देहरादून की छविइ अब एक प्रदूषित शहर की बनती जा रही है। इस समय दून में कुल पंजीकृत वाहनों की संख्या करीब सात लाख है। और हर साल पचास से साठ हजार नए वाहनों के सड़कों पर उतरने से आने वाले समय में यह तस्वीर खौफनाक हो सकती है।

क्या है वहानो की अंधाधुंध बढ़ोतरी की वजह

सीमित सड़कों पर बढे वाहनों के दवाव के पीछे शहर की जागरूक समझी जाने वाली आबादी बड़ी वजह है। आंकड़ो की बात करे तो देहरादून के हर घर में एक से अधिक सदस्य निजी वाहनों का प्रयोग करते है। जिससे लाखों की संख्या में वाहन सड़कों पर पहुँच जाते है। अपने अपने वाहनों से आने जाने की आदत से दून की सड़कें को रोजाना अनचाहे बोझ से दो चार होना पड़ता है। एसपी ट्रैफिक धीरेन्द्र गुंज्याल के मुताबिक अगर जागरूक लोग कार पुलिंग जैसी व्यवस्था को अपनाते है तो काफी हद तक ट्रैफिक को सड़कों से कम किया जा सकता है। हर बार की तरह इस बार भी दून पुलिस ने एक्शन प्लान तैयार किया था लेकिन इस बार भी नाकाम रहे |

जाने क्या था पुलिस का एक्शन प्लान

शासन से अगर दून पुलिस का प्रस्ताव स्वीकृत होता है तो शहर के लिए तैयार किया गया प्लान मास्टरप्लान साबित हो सकता है। पुलिस की और से जो प्लान शासन को भेजा गया है उसके मुताबिक सहारनपुर रोड से शहर में मसूरी जाने के लिए आने वाले ट्रैफिक को मंडी तिराहे से बल्लूपुर की ओर मोड़कर वाया सर्किट हॉउस, जैंतन वाला , जोहड़ी गांव होते हुए मालसी डियर पार्क के पास निकाला जा सकता है। इससे मसूरी जाने वाले लोगों को दून के चौराहों में जाम के झाम में नहीं फसना पडेगा। दूसरे प्लान में पुलिस ने भंडारीबाग़ से बिंदाल जाने वाले नाले को कवर कर उस पर यातायात चलाने का प्रस्ताव शाशन को दिया है। इससे सहारनपुर रोड से चकराता रोड जाने वाले ट्रैफिक को प्रिंस चौक , तहसील चौक और घण्टाघर से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा लेकिन बदकिस्मती वाली बात ये रही की प्रस्ताव तो स्वीकृत हो गया था लेकिन वहां भी दून पुलिस नाकाम रही |

रिपोर्ट-शादाब

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