भ्रष्टाचार के चलते नहीं हो पा रहा स्वास्थ्य केंद्र में गरीबों का इलाज़

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बांगरमऊ(उन्नाव ब्यूरो)- नगर में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में व्याप्त भारी भ्रष्टाचार व अनियमितता के चलते गरीब मरीजों को सही उपचार नहीं मिल पा रहा है और दवाइयां भी भारी कमीशन देने वाले अस्पताल के ठीक सामने स्थित मेडिकल स्टोरों पर ही लेने को मजबूर किया जाता है। कुल मिलाकर प्रदेश की योगी सरकार के सख्त निर्देशों को भी ताक पर रखकर यहां मनमानी व तानाशाही के साथ काम किया जा रहा है और संबंधित अधिकारियों की सांठगांठ व मिलीभगत के चलते कोई कार्यवाही भी नहीं हो पाती है| जिसके चलते इनके हौसले बढ़ते जा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के स्पष्ट निर्देश होने के बावजूद भी सभी चिकित्सक निर्धारित समय तक अस्पतालों में बैठकर संतोषजनक मरीजों को देखें और सारी दवाइयां भी सरकारी अस्पताल से ही दी जाएं। जिससे इलाज के लिए मरीजों को इधर-उधर न भटकना पड़े लेकिन यहां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के निर्देश कोई मायने नहीं रखते। जांच कराने के नाम पर सभी मरीजों को कमीशन वाले स्थानों पर एक्स-रे व अल्ट्रासाउंड तथा अन्य पैथोलॉजी की जांचों के लिए बाहर भेजा जाता है। जिसमें 40 से 50% तक कमीशन संबंधित चिकित्सक के पास आ जाता है। इसके अलावा दवा वितरण के नाम पर सिर्फ लाल, पीली व सफेद रंग की चंद गोलियां देकर बाकी सभी महत्वपूर्ण दवाएं सरकारी अस्पताल के ठीक सामने स्थित मेडिकल स्टोरों से ही लाने के लिए कहा जाता है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि सरकारी अस्पताल के चिकित्सकों द्वारा लिखी गई दवाएं ज्यादातर इन्हीं मेडिकल स्टोरों पर ही मिलती हैं और यह लोग भी संबंधित चिकित्सकों को भारी कमीशन देते हैं। इसलिए सरकारी अस्पताल के सामने स्थित दवा विक्रेता अधिकतम खुदरा मूल्य की मनमानी धनराशि मरीजों के परिजनों से वसूल करके लाखों रुपए महीने कमा रहे हैं। यहां के चिकित्सक सांठ गाँठ व आपसी समझौते के आधार पर यहां बारी-बारी से सुविधानुसार अपने मनमुताबिक ड्यूटी करते हैं।
इमरजेंसी पर भी तैनात चिकित्सक इमरजेंसी रूम में न बैठ कर अपने सरकारी आवासों पर आराम करते रहते हैं। जब कोई मरीज आता है और पूछताछ करके डॉक्टर के कक्ष तक पहुंच कर विनती कर गिड़ गिड़ाता है तब काफी देर बाद चिकित्सक इमरजेंसी रूम में आकर मरीज के देखने की खानापूर्ति करता है।

ऐसी घोर लापरवाही वह अनियमितता के चलते गंभीर व दुर्घटना वाले मरीजों की जान भी चली जाती है लेकिन पत्थर दिल इन चिकित्सकों के दिल नहीं पिघलते हैं। यहां के चिकित्सकों में एक सबसे खास बात यह है कि कोई थोड़ा भी रिस्क नहीं लेना चाहता है। यहां आने वाले ज्यादातर मरीजों को जो गंभीर या दुर्घटना से पीड़ित होते हैं उनको तुरंत बाहर रिफर करके अपने फर्ज से बच जाते हैं। प्रसव कराने के नाम पर भी तीमारदारों से भारी वसूली की जाती है और पैसा न देने वाले तीमारदारों से मरीज बाहर ले जाने की धमकी देकर उनको बुरी तरह डरा धमका दिया जाता है और प्रसव के बाद दी जाने वाली सरकारी सहायता की धनराशि की चेक देने के नाम पर भी वसूली की जाती है और ऐसा भी नहीं है कि यहां के चिकित्सा अधीक्षक को यह सब मालूम नहीं है परंतु स्वास्थ विभाग के उच्च अधिकारियों की मिलीभगत व साठगांठ के चलते यहां पर यह खेल काफी समय से खेला जा रहा है।

सरकारी अस्पताल की खराब व्यवस्था के बारे में जब यहां के शिक्षक व समाजसेवी फज़लुर्रहमान ने उप जिलाधिकारी इंद्रसेन यादव से शिकायत की तो उन्होंने इस शिकायत को गंभीरता से न लेकर टालमटोल वाला रवैया अपना कर यहां के चिकित्सा अधीक्षक की सिधाई का चिकित्सकों द्वारा फायदा उठाने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया। अब देखना यह है कि शासन /प्रशासन क्या इस पर कोई कार्यवाही करेगा या भ्रष्टाचार व लापरवाही का ये खेल ऐसे ही आगे तक चलता रहेगा।

रिपोर्ट- रामजी गुप्ता
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