कानपुरः कैमरे में कैद हुई आसमान में उड़ती हुई उड़नतश्तरी।

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कानपुर. यहां अनआईडेंटिफाइड फ्लाइंग ऑब्जेक्ट (यूएफओ) यानि उड़नतश्तरी देखे जाने की घटना सामने आई है। श्यामनगर निवासी संतोष गुप्ता और उनके परिवार ने दावा किया है कि बुधवार की सुबह उनके बेटे ने मोबाइल से ये तस्वीरें ली हैं। वहीं, यूएफओ का देखा जाना इलाके में चर्चा का विषय बन गया है।

कानपुर में दिखी उड़न तस्तरी
कानपुर में दिखी उड़न तस्तरी

संतोष गुप्ता का कहना है कि सुबह उनका बेटा अभिजीत मोबाइल से आसमान की फोटो ले रहा था। उसी वक्त उसे आसमान में हल्की रोशनी निकल रही टोपीनुमा कोई चीज उड़ती दिखाई दी। उसने बिना देरी किए उस अजीब रोशनी वाली चीज की तस्वीर अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर ली। इसके बाद उसने ये तस्वीरें घर में दिखाई। जब उन्होंने ध्यान से देखा तो उन्हें वह उड़नतश्तरी की तरह नजर आई।
परिवार के लोगों का दावा है कि यह फोटो पूरी तरह से असली है। इसकी प्रमाणिकता की जांच किसी भी लैब से कराई जा सकती है। अभी तक इस परिवार से जिला प्रशासन या अन्य जगह से कोई सूचना नहीं मांगी गई है।
24 जुलाई 2014 को लखनऊ में देखा गया था यूएफओ

राजधानी में 24 जुलाई 2014 को एक उड़नतश्तरी देखे जाने की घटना सामने आई थी। राजाजीपुरम ई ब्लॉक सेक्टर-11 निवासी अमित त्रिपाठी ने एक अजीब रोशनी वाला गोला आसमान में देखा था। उस समय वह अपनी बालकनी में बैठा मोबाइल से सनसेट की तस्वीर खींच रहा था। तभी उसे सूरज के बगल में एक रोशनी का गोला दिखाई पड़ा। देखते ही देखते वह गोला तेजी से आसमान में घूमने लगा।
अमित ने बिना देरी किए उस अजीब रोशनी वाली चीज की तस्वीर अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर ली। करीब 40 सेकंड में वह गोला तेजी से ऊपर उठा और गायब हो गया था। यह बात जब खगोलशास्त्रियों को पता चली तो हड़कंप मच गया था। तत्काल उन्होंने उस तस्वीर की जांच की थी और प्रथमदृष्टया उसे एक

क्या है यूएफओ
उड़नतश्तरी आकाश में उड़ती किसी अज्ञात वस्तु (यूएफओ (UFO)) को कहा जाता है। इन अज्ञात उड़ती वस्तुओं का आकार किसी डिस्क या तश्तरी के समान होता है या ऐसा दिखाई देता है, जिस कारण इन्हें उड़नतश्तरियों का नाम मिला। कई चश्मदीद गवाहों के अनुसार, इन अज्ञात उड़ती वस्तुओं के बाहरी आवरण पर तेज प्रकाश होता है और ये या तो अकेले घूमते हैं या एक प्रकार से लयबद्ध होकर और इनमें बहुत गतिशीलता होती है। ये उड़न तश्तरियां छोटे से लेकर बहुत विशाल आकार तक हो सकती हैं।

यूएफओ मानने के कारण
– जुलाई, अगस्त के मौसम में पृथ्वी उल्का पिंडों के नजदीक से निकलती है, लेकिन ये आसमान में टूटते तारे जैसे दिखते हैं। लगातार बने रोशनी के गोले जैसे नहीं।
– 25 फरवरी 2014 को भारत-पाकिस्तान सीमा पर कथित यूएफओ दिखने के दावे के बाद सुखोई-30 विमान को इसकी खोज में भेजा गया।
– 19 जुलाई 2014 को शामली में यूएफओ देखे जाने की सूचना खगोल वैज्ञानिकों को मिली थी।
– 4 अगस्त 2013 को लद्दाख के देमचोक में लगान खेल इलाके में जवानों ने यूएफओ देखा था।
– 24 अगस्त 2008 को यूपी के बिजनौर में यूएफओ देखे जाने की खबर आई थी।
– 24 जून 1947 को अमेरिकी बिजनेसमैन केनेथ अर्नाल्ड ने नौ चमकीले यूएफओ देखने का दावा किया है।
– 1947 में ही प्रोजेक्ट ब्लू बुक के तहत यूएफओ की स्टडी आरंभ हुई।
– जुलाई और सितंबर 2010 में चीन में एयरपोर्ट के पास कथित यूएफओ दिखने के बाद एयरपोर्ट कई घंटों तक बंद रहा।
– 5 अगस्त 2012 को मंगल ग्रह पर गए क्यूरियोसिटी रोवर से मिली तस्वीरों में दूसरे ग्रह के लोगों की मौजूदगी का दावा किया गया।

हॉलीवुड की फिल्मों में यूएफओ का ट्रेंड
-ब्रूस जेंट्री (1949) की फिल्म में पहली बार यूएफओ दिखाया गया।
-द फ्लाइंग सॉसर (1950) यूएफओ पर केंद्रित पहली फिल्म है।
-द डे द अर्थ स्टूड स्टिल (1951) में यूएफओ और दूसरे ग्रह से आए प्राणियों की स्टोरी बताई गई है।
-क्लोज एनकाउंटर्स ऑफ द थर्ड काइंड (1977) यूएफओ और एलियंस से एनकाउंटर की स्टोरी।
-इटी: द एक्स्ट्रा टेरेस्टियल (1982), एक छोटे बच्चे की कहानी है, जो यूएफओ देख लेता है। बॉलीवुड फिल्म ‘कोई मिल गया’ इसी का रीमेक थी।
-इंडिपेंडेंस डे (1996) एक यूएफओ के पृथ्वी पर आने की कहानी है।

News credit – kanpurcitynews

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