उमर खालिद ने पहला पोस्ट डिलीट कर किया उससे भी ज्यादा चौकाने वाला पोस्ट, सेना और देश पर की अमर्यादित टिपण्णी

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junaid

हिजबुल मुजाहिदीन आतंकी बुरहान को क्रांतिकारी बताने वाले जेएनयू छात्र उमर खालिद ने बुरहान के समर्थन वाला अपना पोस्ट फेसबुक से हटा तो लिया पर उसके बाद उसने जो लिखा वह और भी चौकाने वाला है |

पहला पोस्ट :-

चे ग्वेरा ने कहा था कि अगर मैं मारा भी जाऊं तो मुझे तब तक फर्क नहीं पड़ता जब तक कोई और मेरी बंदूक उठाकर गोलियां चलाता रहेगा. शायद यही शब्द बुरहान वानी के भी रहे होंगे. बुरहान मौत से नहीं डरता था, वो ऐसी जिंदगी से डरता था जो बंदिश में जी जाए. उसने इसका विरोध किया. वो आज़ाद जिया और आज़ाद मरा. कश्मीर पर कब्ज़े का खात्मा हो. भारत, तुम उन लोगों को कैसे हराओगे जिन्होंने अपने डर को हरा दिया है. हमेशा ताकतवर रहो बुरहान. कश्मीर के लोगों के साथ पूरी सहानुभूति. #FreeKashmir ”

पहला पोस्ट डिलीट करने के बाद दूसरा पोस्ट :-

‘ट्रोलर आर्मी, मैं हार मानता हूं, तुम सैकड़ों का सामना मैं अकेला कैसे कर सकता हूं. हां मैं गलत था, मुझे वानी की मौत की खुशी में तुम्हारा साथ देना चाहिए था. देशद्रोही, गद्दार, आतंकी मुझे माफ करना, कल से मैं तुम्हारी
राष्ट्रवाद की मर्दानगी को संतुष्ट करने में मदद करूंगा.’
‘मैं हत्याओं, रेप और टॉर्चर, गायब कर देने, AFSPA और सब चीजों की खुशी मनाऊंगा. कल से मैं भी कमजोरों को सताकर खुश और ताकतवर बनने वाली आपकी भीड़ का हिस्सा हो जाऊंगा. पर मेरे राष्ट्रवादी दोस्तों मुझे एक चीज बताना कि क्या इससे कश्मीर में जमीनी हालात बदल जाएंगे ?’

उमर खालिद के फेसबुक पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर बवाल मचा. यहां तक की जेएनयू छात्र संघ भी बंट गया. लेकिन, बावजूद इसके उमर खालिद ने अपने रुख में कोई बदलाव नहीं किया है |

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