राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा किया गया संघ शिक्षा वर्ग का आयोजन

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प्रतीकात्मक

सुलतानपुर(ब्यूरो)- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आयोजित संघ शिक्षा वर्ग के समापन के अवसर पर संघ के सहसरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने आज यहाॅं कहा कि भारत आज विश्व में अपने सम्मानित स्थान प्राप्त करने के स्वर्णिम चरण पर पहुंचने के लिए उद्यत हुआ है। भारतीय संस्कृति की श्रेष्ठ विरासत जैसे योग, आयुर्वेद, संस्कृत, परिवारपद्धति, पर्यावरण के प्रति दृष्टिकोण समूचे जगत को (मानवता को) सार्थक जीवन दर्शन देने में सक्षम है। यह सभी अनुभव कर रहे हैं।

सरस्वती विद्या मन्दिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय परिसर में 22 मई से चल रहे स्वयंसेवकों के संघ शिक्षा वर्ग के समापन समारोह को सम्बोधित करते हुए श्री होसबाले ने कहा कि भारत भूमि की यह सारी श्रेष्ठ परम्परायें हिन्दू समाज की सुदीर्घ सभ्यता की ही देन है। ऐसे हिन्दू समाज में दुर्भाग्य से जातिभेद, छुआछुत, स्वार्थपरता, अनैतिकता जैसे सामाजिक बुराईयां भी होना एक अभिशाप है एवं अमानवीय आचरण है। इससे राष्ट्रीय एकता और  सामाजिक एकात्मता बाधित होती है। इन्हीं का निराकरण करने हेतु हिन्दुओं में व्यक्तिगत चारित्र्य और राष्ट्रीय चारित्र्य का विकास कर समाज का संगठन करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विगत 90 वर्षो से एक साधना कर रहा है।

संघ कार्य समाज परिवर्तन व राष्ट्रीय पुनर्निर्माण का महाभियान है। समाज के सहयोग, श्रेष्ठ संत विभूतियों के आशीर्वाद तथा कार्यकर्ताओं के असीम परिश्रम से संघ आज एक राष्ट्रीय शक्ति के रूप में उभरा है। यह दैवीशक्ति है।  उन्होंने कहा कि संघ के व्यक्ति निर्माण के प्रयास का ही अंग है, यह संघ शिक्षा वर्ग। ऐसे वर्गों में प्रशिक्षण पाये हजारों-लाखों स्वयंसेवक राष्ट्र जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय होकर समाज संगठन एवं समाज परिवर्तन के कार्यों में, सेवा व विकास के प्रयासों में समाजरक्षा तथा संस्कार निर्माण की साधना में लगे हैं।

सहसरकार्यवाह ने कहा कि स्वतंत्रता आन्दोलन में अपने सहभाग से योगदान दिये संघ संस्थापक पू0 हेडगेवार जी ने प्रामाणिकता से, निस्वार्थता से, अपने तन-मन-धन समर्पण करके आजीवन कार्य करने वाले स्वयंसेवकों को तैयार करने के लिए शाखा प्रारम्भ किया। आज यह एक अत्यन्त सफल-सिद्ध तंत्र के रूप में सर्वदूर परिचित है। संघ ने इस भारत भूमि की मिट्टी की सुगंध ‘हिन्दुत्व’ के आधार पर ही राष्ट्रीयपुनर्निर्माण का प्रयास कर रहा है, वहीं उसका वैचारिक अधिष्ठान है। हिन्दुत्व सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय अवधारणा है न कि सांप्रदायिक। स्वामी विवेकानन्द महर्षि अरविंदो, महात्मा गांधी जी, महामना मालवीय जैसे विभूतियों ने हिन्दू संस्कृति व हिन्दू विचार दर्शन की ही बात की।

हिन्दू समाज एकात्म, समरस, संगठित, परिश्रमी, स्वाभिमानी, समृद्धशाली हुए बिना भारत राष्ट्र की उन्नति असंभव है। एक ओर भारत के अभ्युदय का महाद्वार खुल रहा है, परन्तु दूसरी ओर इस राष्ट्र को तोड़ने का, हिंसा से, भय से इसे आतंकित करने के प्रयास भी कुछ राष्ट्रविरोधी दुष्टशक्तियों द्वारा हो रहे है। भारत के स्वाभिमान, अतीत के गौरव एवं समाज के श्रेष्ठ उपलब्धियों को नकारते हुए केवल नाकारात्मक दोषों को ही और मजबूत करने का भी प्रयत्न हो रहा है। हमें इससे सतर्क रहना चाहिए। संगठित व जागृत समाज ही ऐसी शक्तियों का नाश कर सकता है।

पश्चिम बंगाल में हिन्दु समाज पर आक्रमण, गौहत्या को एक अधिकार के रूप में आगे बढ़ाने की मानसिकता, हिंसा पर विश्वास रखने वाला माओवादी आंतकवाद कश्मीर में राष्ट्रविरोधी शक्तियों का अटाटोप, सामाजिक एकता, समरसता, सामाजिक न्याय को तिलांजली देनेवाले समाज में कई बार होने वाली दुर्घटनाएं- इन गतिविधियों के बारे में समाज जागृत रहकर और डटकर इनका प्रतिरोध करना चाहिए। संघ के स्वयंसेवक इस कार्य में लगे हैं। समाज के सज्जनों का सहयोग भी मिल रहा है। हम उनके आभारी है। संघ के कार्य को समाज समर्थन देता है। हम अनुरोध करते हैं कि संघ के इस राष्ट्रीय महायज्ञ में आप भी सक्रियता से जुड़ जाइयें।

इससे पहले कार्यक्रम अध्यक्ष मुख्य ग्रंथी गुरूद्वारा श्रीगुरू सिंह सभा ज्ञानी कुलदीप सिंह ने राष्ट्रभाव जागरण के लिए कार्य कर रहे लोगो को बधाई दी। कार्यक्रम में वर्ग कार्यवाह ललराम चैधरी, राम समुझ यादव, विभाग संघचालक डा. रमाशंकर मिश्र, सर्वाधिकारी डाॅ. सत्येन्द्र प्रसाद मिश्र, प्रयाग नारायण त्रिपाठी, क्षेत्र कार्यवाह राम कुमार वर्मा, प्रान्त प्रचारक अनिल जी सहित अखिल भारतीय, क्षेत्र व प्रान्तीय स्तर के कई अधिकारी मौजूद रहें।

रिपोर्ट- संतोष यादव

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