प्रशासन की बेदखली की कार्यवाही गैरकानूनी: अखिलेन्द्र

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लखनऊ(ब्यूरो)- बरसात के इस मौसम में चिड़ियों का भी घोसला नही उजाड़ा जाता है परन्तु प्रशासन और वन विभाग द्वारा नौगढ़ के मझंगाई में गरीबों के घरों को तहस नहस कर दिया गया जो गैरकानूनी के साथ कही से भी न्याय संगत नही है। उ0 प्र0 सरकार को वनाधिकार कानून को प्रदेश में लागू करने के सम्बंध में उच्च न्यायालय द्वारा दिए आदेश का सम्मान करना चाहिए और तत्काल वन भूमि पर पुश्तैनी रूप से बसे आदिवासियों एवं वनाश्रितों की बेदखली पर रोक लगाकर वनाधिकार कानून के तहत पेश दावों का विधि के अनुरूप निस्तारण करना चाहिए। जिन गरीबों का नौगढ़ में मकान गिराया गया है और फसल बर्बाद की गयी है, उन्हें तत्काल मुआवजा देना चाहिए। यह मांग आज मुख्यमंत्री को भेजे अपने पत्र में स्वराज अभियान की राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने उठायी।

कल चंदौली जनपद की नौगढ़ तहसील के गांव मझंगाई के कचनरवा नाला में जिला प्रशासन, पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने लगभग 40 परिवारों को वनभूमि पर उनके पुश्तैनी कब्जे से बेदखल कर दिया। इस सम्बंध में ग्रामीण मजदूर मंच के जिला सहसंयोजक रामेश्वर प्रसाद के नेतृत्व में गई जांच टीम ने अखिलेन्द्र को अपनी रिपोर्ट भेजी है। रिपोर्ट में बताया गया कि गांव के शम्भू वनवासी, लालती वनवासी, धूरा कोल, तुलसी चमार, सुरेन्द्र चमार, राम दुलारे कोल, रमेश कोल, राम प्रवेश कोल, शेर अली, श्रीनाथ कोल, छविनाथ यादव समेत 40 गरीबों के बरसात के इस मौसम में घर गिरा दिए गए, उनके कुएं पाट दिए गए और घर में रखे अनाज को तहस नहस कर दिया गया। उनके खेतों में जेसीबी मशीन लगाकर खोदाई कर दी गयी। उनके घरों में लगे सोलर लाइट तक को प्रशासन के लोग उठाकर ले गए।

जांच टीम ने देखा कि इनमें से कई लोगों ने वनाधिकार कानून के तहत दावा भी जमा किया हुआ है, जिसके सम्बंध में आजतक दावेदार को कोई सूचना नहीं दी गयी है। जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि इससे पहले भी वन विभाग के द्वारा ग्राम गोलाबाद, बोदलपुर, जयमोहनी के चोरमोरवां, भैसोड़ा में बेदखली की कार्यवाही की गयी है और सुखदेव पुर में ग्रामीणों के धान की खेती किए खेतों में बबूल के कांटे और बीज डाल दिए गए।

जांच रिपोर्ट के आधार पर अखिलेन्द्र ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि वनाधिकार कानून के अनुपालन के सम्बंध में हमारे संगठन की जनहित याचिका में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की खण्ड़पीठ ने स्पष्ट कहा है कि उ0 प्र0 सरकार संशोधन नियम 2012 के अनुसार वनभूमि पर प्रस्तुत दावों के सम्बन्ध में विधिक प्रक्रिया अपनाते हुए मान्यता और सत्यापन प्रक्रिया पूर्ण करें। नियम 2012 के अनुसार दावेदार को उसके दावे के निस्तारण के सम्बंध में लिखित रूप से सूचित करना है। यहीं नहीं वनाधिकार कानून खुद कहता है कि दावों के सम्बंध में मान्यता और सत्यापन प्रक्रिया पूरी बिना किसी को भी उसके पास जमीन से बेदखल और हटाया नहीं जायेगा। इस सम्बंध में बार-बार पत्रक देने के बाद भी न्यायालय के आदेश का सम्मान नहीं किया जा रहा है। इसलिए प्रशासन द्वारा नौगढ़ में की जा रही बेदखली की कार्यवाही विधि के विरूद्ध है। प्रशासन को न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए बेदखली की कार्यवाही पर रोक लगानी चाहिए।

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