साहित्यभारती के 24वें उत्सव में काव्य रस से पूरी रात सराबोर हुआ उन्नाव

0
155


उन्नाव(ब्यूरो)- जनपद की अग्रणी संस्था साहित्य भारती के 24वें वार्षिक कवि सम्मेलन और सम्मान समारोह का शुभारम्भ कमला मैदान में बनाए गए भव्य विशाल मंच पर मुख्य अतिथि विधान सभा अध्यक्ष हृदय नरायण दीक्षित, अध्यक्ष कमल किशोर मिश्रा, विशिष्ट अतिथि विधायक कुलदीप सिंह सेंगर, सदर विधायक पंकज गुप्ता में माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्र्यापण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया। संस्था की 24 वर्षीय स्वर्णिम साहित्यिक यात्रा की स्मृति आख्या महामंत्री कुँ. मनीष सिंह सेंगर नें प्रस्तुत की।

स्वागताध्यक्ष अरविन्द कमल ने मंचासीन अतिथियों व साहित्यकारों के स्वागत में उद्बोधन दिया। संस्थापक अतुल मिश्रा ने वरिष्ठ साहित्यकार मदन मोहन मिश्रा का नाम अध्यक्षता के लिये प्रस्तावित कर अध्यक्ष सहित सभी अतिथियों, वाणीपुत्रों और संस्था के वरिष्ठ पदाधिकारियों को मंच पर स्थान दिलाकर सम्मान प्रक्रिया की शुरुआत कराई। मुख्य अतिथि श्री दीक्षित जी को साहित्य अलंकरण अध्यक्ष चन्द्र प्रकाश शुक्ला, पू. अध्यक्ष बाबू राम शुक्ला, संस्थापक अतुल मिश्रा, महामंत्री मनीष सिंह सेंगर, के.डी. त्रिपाठी ने सम्मानित किया। वि. अतिथि विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को साहित्य महिमा अलंकरण, सदर विधायक पंकज गुप्ता को साहित्य सृजन अलंकरण, चन्दल लाल त्रिपाठी को साहित्य कर्म अलंकरण, राम कृष्ण शुक्ला को शैक्षिक अलंकरण, पालिका अध्यक्ष को साहित्य भक्ति अलंकरण, कमल किशोर सक्सेना को साहित्य सौष्ठव, उमा निवास बाजपेयी को साहित्य आशीष, श्रीमती सोनी शुक्ला को साहित्य स्वर अलंकरण के साथ देश के अलग-अलग भागों से पधारे वाणीपुत्रों और पुत्रियों में पद्मश्री व सुविख्यात हास्य कवि सुरेन्द्र शर्मा को एक लाख बीस हजार राशि के साथ साहित्य भारती अलंकरण, चिराग जैन को साहित्य प्रताप अलंकरण, आइ.ए.एस. डाॅ. अखिलेश मिश्रा को साहित्य वाचस्पति अलंकरण, प्रियांशू गजेन्द्र को साहित्य सौरभ अलंकरण, मुमजाज़ नसीम को साहित्य ताज़ अलंकरण, डाॅ. ममता शर्मा को साहित्य प्रेम अलंकरण, फारुख सरल को साहित्य लोक अलंकरण, अंसार काम्बरी को साहित्य अदब, के.डी. शर्मा हाहाकारी को साहित्य कलाधर, मदन मोहन मिश्रा को साहित्य श्री अलंकरण, स्वयं श्रीवास्तव को साहित्य पुष्प अलंकरण से नवाज़ा गया। अलग-अलग अलंकरण स्व. सुन्दर लाल मिश्र ‘मिश्रेष’, स्व. जगत नारायन, स्व. के.एल. भारती, स्व. बृज किशोर शुक्ला, पं. मुरलीधर शर्मा, स्व. कुसुम सेंगर, स्व. पं. लालता प्रसाद, स्व. नरेश कुमार निगम, स्व. महावीर सिंह, स्व. ब्रज कृष्णा देवी, पं. प्रताप नारायण मिश्र, चै. राघवेन्द्र सिंह, स्व. सुजान सिंह, स्व. नरेन्द्र अवस्थी, स्व. एस.आर.पी. शुक्ला, स्व. मुन्ना लाल मिश्र, मरहूम एस.एम. मारुफ, स्व. विश्व नाथ दीक्षित एवं कमला देवी, स्व. राजेन्द्र शंकर त्रिपाठी, स्व. श्याम सुन्दर अवस्थी की स्मृति में प्रदान किये गए। सम्मान करनें वालों में अतुल मिश्रा, रविसहाय मिश्र राधे, मदन मिश्रा, चन्द्र प्रकाश शुक्ला, अजीत पाल सिंह, राम तनेजा, मनीष सिंह सेंगर, मुन्ना सिंह अवधूत, वरिष्ठ पत्रकार राजेश शुक्ला, अमित शुक्ला सौरभ, जी.एस. भदौरिया, जयचन्द्र जायसवाल, स्मारिका अरुणिमा के सम्पादक संजय राठी, मनोहर सिंह अरोड़ा, आलोक पाण्डेय, ललित मिश्रा, संजय शुक्ला, संजय त्रिपाठी, अशुतोष दीक्षित, भुवन दीक्षित, श्रीमती सुमन अवस्थी, इन्द्र नाथ अवस्थी, श्रीमती निम्मी अरोड़ा, श्रीमती पूनम मिश्रा, गिरीश मिश्रा, शशिकान्त गुप्ता, विश्वास त्रिपाठी, अभिषेक दीक्षित, रवीन्द्र शुक्ला, रामदेव शुक्ला, डाॅ. श्रीकेष पाण्डेय, डा. अखिलेश सिंह, अमित गुप्ता, संजय त्रिपाठी, बार अध्यक्ष सतीश कुमार शुक्ला, अजेन्द्र अवस्थी, संदीप शुक्ला, श्रीमती दिव्या अवस्थी, कन्हैया अवस्थी, दिलीप गुप्ता गुड्डू, उप सम्पादक सौरभ मिश्रा, पूर्व महामंत्री अनुराग अवस्थी, कुँ. राजेन्द्र सिंह सेंगर, विष्णु सहाय सक्सेना, सुरेश पाण्डेय, गुरु प्रसाद तिवारी, अमरेन्द्र सिंह, बी.जी. त्रिपाठी, मनोज सिंह सेंगर, विनोद कृष्ण शर्मा राजा बाबू, अनुभव शुक्ला आदि प्रमुख रहे। संस्था की स्मारिका अरुणिमा और गीतकार राष्ट्रसेवक मनोज कुमार मनुज के रचना संग्रह ‘गोरी तेरे गांव में’ का विमोचन मंचासीन अतिथियों और साहित्यकारों ने किया।

विधायक कुलदीप सिंह ने साहित्य भारती के अगले आयोजन में कमल भवन और मैदान को नये कलेवर व अधुनिक व्यवस्थाओं के साथ उपलब्ध कराने की घोष्णा की। वहीं सदर विधायक पंकज गुप्ता ने ऐतिहासिह आयोजन के लिये बधाईयां दी। मुख्य अतिथि हृदय नारायण दीक्षित ने जहां न पहुंचे रवि वहां पहुंचे कवि से अपनी बात की शुरुआत करते हुए कहा कि संस्था और उसके पदाधिकारी धन्य है जो जनपद के साहित्यिक महापुरुषों के नाम पर प्रति वर्ष लगभग ढ़ाई दशक से ऐसे उत्कृष्टतम आयोजन कर उन्नाव की साहित्य उर्वरा धरती पर देश के मूर्धन्य वाणी पुत्रों और पुत्रियों को आमंत्रित कर जिले के नागरिकों के मस्तिष्क में साहित्य का सुखद अनुभव निरंतर व्याप्त कराते जा रहे हैं, श्री दीक्षित ने पूरी संस्था को आशीर्वाद देते हुए वाणी को विराम दिया। आगरा से पधारी साहित्य और टीवी जगत में विख्यात डाॅ. ममता शर्मा ने वाणी वंदना की सरस प्रस्तुति के बाद अपने काव्यपाठ में पढ़ा ‘राधा को कृष्ण की देह मिली, बिन देह के नेह निभा गई मरा’, कवि सम्मेलन का बड़ा ही मनमोहक और सभी को जोड़ने वाला संचालन कर रहे दिल्ली से आये चिराग जैन ने पढ़ा ‘जहां लवकुश अवध के शैर्य को निस्तेज करते हों, उसी इतिहास की साक्षी बनी उन्नाव की धरती’, अलीगढ़ की मायनाज़ शायरा मुमताज़ नसीम ने पढ़ा ‘कई साल बाद मिले हो तुम, कहां खो गये थे जवाद दो, मेरे आंसुओं को न पोंछो तुम, मेरे आंसुओं का हिसाब दो’, उन्नाव से रमई काका की परंपरा निभाते हुए के.डी. शर्मा हाहाकारी ने पढ़ा ‘ गांव गली मा चर्चा यहिकै, चर्चा शहर औ थाने मा, माननीय मुलायम का कही दीन्हेन मोदी जी के काने मा’, तेजी से चर्चा में आये युवा बाराबंकी के प्रियांशू गजेन्द्र ने पढ़ा ‘दहकते धरती गगर में महकने दो प्यार मेरा, नागफनियों की गली में फूलों का व्यापार मेरा’, उन्नाव के स्वयं श्रीवास्तव ने पढ़ा ‘बहुत काली अंधेरी रात के साये में एक सूरज, सुलभ सामर्थ के बल पर निकलना सीख लेता है’, लखीमपुर से आये फारुख सरल ने पढ़ा ‘बूंद-बूंद से गहरा सागर बनता है, ऊंचा पर्वत कण-कण मिलकर बनता है’, आइ.ए.एस. डाॅ. अखिलेश मिश्रा ने अपने अनूठे अंदाज में पढ़ा ‘किया क्यों ऐसा तुमने काम, राम रहीमा रब ईषा अरे कितने रख लिये नाम’, उन्नाव के व्यंगकार उमा निवास बाजपेयी ने पढ़ा ‘ना बप्पा कउनौ ओहदा पर, ना मामा कहूं मिनिस्टर हैं’, साहित्य भारती अलंकरण से नवाज़े गये, दिल्ली से पधारे हास्य के अप्रतिम हस्ताक्षर सुरेन्द्र शर्मा ने बात-बात में लोगों को ठहाके लगवाने वाले जुमलों के साथ पढ़ा कि ‘काई फरक नहीं पड़ता इस देश में राजा रावण हो या राम, जनता तो बेचारी सीता की रावण राजा हुआ तो वनवास से चोरी चली जाएगी और राम राजा हुआ तो अग्नि परीक्षा के बाद फिर वनवास भेज दी जाएगी’, मदन मोहन मिश्र मनु ने पढ़ा ‘जिस जगह पसीना गिराया है इंसां ने उस धरती के पत्थर पारस बन जाते हैं’, कमल किशोर सक्सेना ने विरोधात्मक काव्य पाठ किया।

सम्मान समारोह का संचालन संस्थापक अतुल मिश्रा और महामंत्री मनीष सिंह सेंगर ने किया। काव्य समारोह का का संचालन कुमार विश्वास की शैली में चिराग जैन ने किया। समापन पर अतुल मिश्रा ने सभी के प्रति आभार जताया।

रिपोर्ट- जितेन्द्र गौड़

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here