मेरी माँ को हमारी जीविका के लिए देह व्यापर के दलदल में जाना पड़ा

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human of bombay

जब मेरे पापा का निधन हुआ मेरी माँ और हम तीन बहनों के लिए जीवन नर्क जैसा हो गया मेरी माँ और पापा दोनों के ही परिवार हमें एक बोझ की तरह देखने लगे और जीविका चलने के लिए मेरी माँ वैश्या बन गयी मेरे मामा अक्सर हमारे घर के किराए का कुछ हिस्सा दे देते थे इसलिए ऐसा सोचने लगे थे कि हमारे जीवन पर उनका अधिकार है, अगर हम बिना बुर्के के घर के बहार दिह भी जाएँ तो हमें बुरी तरह पीटा जाता था मेरे पापा भी मुस्लिम थे पर वह कभी भी हमारी शिक्षा के खिलाफ नहीं थे और नाही बुरका पहनने को मजबूर करते थे |

अंत में मेरी माँ ने हम बहनों को हॉस्टल भेजने का फैसला किया, 8 लम्बे सालों के बाद हम ‘क्रांति’ गए और यहाँ हम खुश हैं, मेरी माँ का परिवार उनसे पूछता है हम खान है उन्हें लगता है मेरी माँ ने देह व्यापर के लिए हमें बेंच दिया है पर सच यह है कि वह हमारी और हमारे भविष्य की रक्षा कर रहीं हैं |

आज मै ‘TEACH FOR INDIA’ में टीचर हूँ मै इन बच्चों को बहुत अच्छे से समझती हूँ क्योकि मुझे पता है कि ऐसे समय में कैसा लगता है ? और मै उन्हें लगातार पढ़ते रहने का आत्मविश्वास दिलाना चाहती हूँ, कभी कभी जब वे मुझे देखकर मुस्कराते हैं मुझे बहुत रहत मिलती है, पर अभी बहुत कुछ करना है न सिर्फ मेरे जैसे बच्चों के लिए बल्कि उन औरतों के लिए भी जिन्हें न चाहते हुए भी देह व्यापर जैसे काम में जाना पड़ता है |

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Via – Humans Of Bombay

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