पल-पल बदल रही है स्थितियां न जाने किसकी होगी “जय”

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आजमगढ़ (ब्यूरो)- जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे स्थितियां पल-पल बदलती जा रही हैं। चट्टी चौराहों व गांव-गिरांव पर समीकरण बन और बिगड़ रहे हैं। दसों विधानसभा में प्रत्याशियों ने अपनी ताकत झोंक दी है। मतदाताओं को लुभाने के लिए स्टार प्रचारक भी कमान संभाल चुके हैं। दूसरी तरफ आयोग के चाबुक की वजह से निर्दलियों की सांस अटकी हुई है। विधानसभा क्षेत्र में निर्दली प्रत्याशी को कोई पहचान ही नहीं रहा है कि उनका प्रत्याशी कौन है। ऐसे में निर्दलियों के दांव नहीं चल पा रहे हैं।

जनपद में दस विधानसभाओ में कुल 116 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। दसों विधानसभा में लड़ाई सपा-कांग्रेस, भाजपा व बसपा के बीच ही चल रही है। कहीं-कहीं छोड़ दिया जाए तो निर्दलियों का कोई मायने नहीं रखता है। वह केवल वोट काटने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। जनपद की आजमगढ़ सदर, गोपालपुर, सगड़ी, अतरौलिया, निजामाबाद, मेंहनगर सुरक्षित, लालगंज सुरक्षित, दीदारगंज, फूलपुर-पवई, मुबारकपुर विधानसभाएं हैं।

यहां देखा जाए तो तीनों प्रमुख दल सपा-कांग्रेस, बसपा व भाजपा में ही लड़ाई चल रही है। ऐसे में सभी दलों के प्रत्याशी गांवों की गलियों की खाक छान रहे हैं। चट्टी चौराहों पर प्रतिदिन सरकार बिगड़ और बन रही हैं। कुल मिलाकर कोई भाजपा की सरकार बना रहा है तो कोई सपा-कांग्रेस की। इसके अलावा बसपा की सरकार बनने की चर्चा चल रही है। इस चर्चा को लेकर गांवों में बहसबाजी व कयासों का दौर शुरू हो गया है। इस कयास व दौर पर 11 मार्च को मतदान रिजल्ट आने के बाद ही विराम लगेगा।

रिपोर्ट-संदीप त्रिपाठी संगम

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