उपजिलाधिकारी हसनगंज की युवा सोच के चलते खाद्य एवं रसद विभाग में हो रही घटतौली पर कसी नकेल

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हसनगंज/उन्नाव (ब्यूरो)- उपजिलाधिकारी हसनगंज की युवा सोच के चलते खाद्य एवं रसद विभाग में हो रही घटतौली को रोकने के लिए एक अनूठी पहल की गई, जिससे एक तरफ पात्र को राशन पूरा मिलेगा वही दूसरी तरफ कोटेदार द्वारा घटतौली भी नही की जा सकेगी, SDM की उस पहल से कोटेदारों के चेहरों पर मायूसी देखने को मिल रही है|

तहसील हसनगंज में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए उपजिलाधिकारी द्वारा एक अनूठा प्रयोग किया जा रहा है। राशन के वितरण के सम्बन्ध में अक्सर कई समस्याएं देखने को मिलती हैं जिसके कारण ढेरों शिकायतें जन सामान्य की प्रशासन को प्राप्त होती रहती हैं। इन शिकायतों के मुख्यतः तीन कारण हैं, फ़र्ज़ी लाभार्थी, उचित दर विक्रेताओं द्वारा घटतौली और निर्धारित दर से ज्यादा रुपये लेना। वर्त्तमान में किये जा रहे आधार लिंकेज और बैंक खाता लिंकेज के जरिये और लाभार्थी सूचियों के सत्यापन व संशोधन से इनमें से दो मुख्य समस्याएं काफी कम होंगी। परंतु घटतौली को रोकना एक बड़ी चुनौती है।

इसी लिए घटतौली को रोकने के लिए तहसील हसनगंज प्रशासन द्वारा माह मई के वितरण में तहसील की पांच दुकानों में एक प्रयोग किया जा रहा है। इस के अंतर्गत इन पांच दुकानों में लाभार्थियों की सूची के अनुसार गेहूं और चावल के निर्धारित माप के सील बंद पैकेट बनवाये गए हैं। इन पैकेट्स को गोदाम स्तर पर अधिकारियों की देखरेख में बनाया गया है और सुनिश्चित किया गया है कि इनमें खाद्यान का तौल कम न हो। जहाँ एक तरफ इन पैकेट्स से कोटेदार का काम काफी आसान होगा इसके साथ ही घटतौली की कोई गुंजाईश नहीं रहेगी। यदि इन थैलियों से कोई छेड़ छाड़ की कोशिश की गयी तो उसे आसानी से पहचाना जा सकेगा। और साथ ही इन थैलियों में से खाद्यान चुराना एक तरह से आर्थिक तौर पर भी ज्यादा फायदेमंद नहीं होगा।

वर्त्तमान में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत अंत्योदय परिवार को 20 किलो गेहूं और 15 किलो चावल देने का प्रावधान है और पात्र गृहस्थी के प्रत्येक यूनिट को 3 किलो गेहूं और 2 किलो चावल देय है। इसी लिए राशन को इन 4 माप के थैलो में पैक किया गया है।

इस प्रयोग/पायलट प्रोजेक्ट हेतु नगर पंचायत नवाबगंज, लालपुर, खपरा मुस्लिम, तेगापुर और ग़ज़फ्फर नगर दुकानों को चुना गया है और इन सभी दुकानों में 13 मई को एक विशेष कैंप लगाकर खाद्यान का वितरण किया जायेगा। क्योंकि इस पूरी प्रक्रिया में पैकेट बनाने में लागत आएगी इसलिए इसे सिर्फ एक प्रयोग की तरह ही किया जा रहा है। प्रयोग के सफल होने पर इसका विवरण शासन में भेजा जायेगा ताकि इसे नीति का भाग बनाने और विस्तारित किये जाने का विचार किया जा सके।

हालांकि उपजिलाधिकारी द्वारा अभी सिर्फ एक तरह का प्रयोग ही किया जा रहा है यदि ये सफल होता है तो राशन लेने वाले ग्रामीणों के साथ जो कोटेदार छल करके घाटतौली, निर्धारित मूल्य से ज्यादा पैसे लेना इन सब बातों पर विराम लगने की पूर्ण संभावना है  श्री बंसल ने  वितरण केंद्रों पर इस पहल को लागू किया और इससे पत्रों को ख़ुशी मिली, उपजिलाधिकारी मनीष बंसल के इस प्रयोग मात्र से ही कोटेदारों की हवाई उड़  गई है  ।

रिपोर्ट- राहुल राठौर 

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