उपेक्षा का दंश झेल रहा मोक्ष स्थल श्मशान घाट, आखिर कौन है इसका जिम्मेवार

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shamsan ghat

वाराणसी(ब्यूरो)- वाराणसी जिला दुनिया के नक्शे में एक ऐसा स्थान है जिसका नाम जेहन में आते ही एक चीज उमड़ आती है और वो है मोक्ष और उस नगरी का नाम है काशी। जहाँ बाबा महाकाल श्मशान नाथ जिनके शरण में सिर्फ मृत शरीर ही अपनी जीवन लीला समाप्त कर पहुँचती है और उसे वहां मिलती है मोक्ष व सांसारिक बन्धनों से मुक्ति। जिसके शरण में जाने से जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर अपने आप ही मनुष्य के दिल व दिमाग में बैठ जाता है।

आज वही मोक्ष स्थली स्थानीय जन प्रतिनिधियों व नगर निगम के अधिकारीयों के अनदेखी के कारण उपेक्षा का शिकार होकर रह गया है। जहाँ लोग अपने परिवार के सदस्यों को मृत्यु के उपरांत अंतिम संस्कार कर मोक्ष प्राप्त कराने के नियत से लेकर आते है परन्तु यहाँ आते ही ऐसा लगता है मानो नर्क में आ गये हो। एक ओर जहाँ चारो ओर गंदगी का अम्बार लगा हुआ है वही दूसरी ओर मेनहोल का पानी सीढ़ी के नीचे से जमीन में छेद करके ऐसे निकलता है मानो जैसे पहाड़ों के बीच से झरने का पानी निकल रहा हो।

दूसरी ओर सीढ़ी से दो-दो फिट उपर तक मिट्टी व राख जमी हुई है जो मेनहोल के पानी से हमेशा गीला बना रहता है और यदि किसी व्यक्ति का उस पर पैर पड़ जाये तो उसे गिरने से कोई नही रोक सकता आपको बता दें कि न जाने कितने लोग रोज गिरते ही होंगे। यदि महाश्मशान के उपेक्षा की बात करे तो इसके लिए जिम्मेदार है यहाँ के जनप्रतिनिधि व नगर निगम के अधिकारी गण जो पूरे नगर में स्वच्छता अभियान चला रहे है, फ्लाई ओवेरो का निर्माण किया व करने का प्रयत्न कर रहे है, मेट्रो ट्रेन चलाने की बात करते है | परन्तु महा श्मशान पर फैली गंदगी को साफ करने की कोशिश कोई नही करता।

पूरे शहर में सुबह और रात में सफाई कर्मियों के द्वारा सफाई कराई जा रही है परन्तु महा श्मशान का हाल जानने का समय किसी भी अधिकारी व जन प्रतिनिधि के पास नही। 5 सालो का प्रदेश सरकार का कार्यकाल पूरा हो गया पुन: प्रदेश सरकार चुनने के लिए जनता को मौका दिया जा रहा है। लगभग 3 वर्षो का कार्य काल केंद्र सरकार का भी बीत गया पुन: 2 सालो के बाद जनता देश की सरकार चुनेगी परन्तु ढाक के तीन पात वाली कहावत अभी तक चरितार्थ होती आ रही है और आगे भी होती ही रहेगी।

देश व प्रदेश का मुखिया बदलेगा, अधिकारी गण बदल दिए जायेंगे, जन प्रतिनिधि बदल जायेगे, परन्तु नही बदलेगी व्यवस्था। सरकारे देश व प्रदेश में योजना चला कर विकास करना चाहती है, परिवर्तन लाना चाहती है, लेकिन सिर्फ कागजो में।

रिपोर्ट-विनय यादव
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