उर्स मेलाः हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है

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रोसड़ा (समस्तीपुर ब्यूरो) : हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक बाबा ख़ास के मजार पर लगने वाला उर्स मेला सदभावपूर्ण माहौल में संपन्न हो गया, प्रखंड के चकथात पश्चिम पंचायत के खैरा दरगाह में होने वाले इस मेले में आस-पास के क्षेत्रों के अलावा देश व विदेश से भी श्रद्धालु दर्शन करने को आते हैं, श्रद्धालु कतार में घंटों खड़ा होकर बाबा ख़ास के मजार पर पूजा-पाठ व चादरपोशी करते हैं |

अकीदतमंदों में हिन्दुओं की संख्या काफी होती है, हिन्दू-मुस्लिम एकता का संदेश देने के साथ-साथ बाबा हजरत ख़ास दुले रहमतुल्लाह अलैहे का यह सालाना तीन दिवसीय उर्स मेला शान्ति-सदभाव एवं आपसी भाईचारे का भी प्रतीक है |

ऐसी मान्यता है कि सच्चे दिल से मांगी गई श्रद्धालुओं की हर मुराद यहाँ पूरी हो जाती है, चाहे वे श्रद्धालु मुस्लिम हों या फिर हिन्दू. व्यवस्थापक कमिटी में भी मुस्लिम के साथ-साथ हिन्दू धर्म के लोग भी शामिल रहते है |

इस उर्स मेला का आयोजन इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक, कमरी माह के 14 से 16 रजब तक मनाया जाता है, तीन दिनों तक चलने वाले इस मेला में रात में भी काफी भीड़-भाड़ देखी जाती है |

बाबा ख़ास के मजार का फाटक अकीदतमंदों के दर्शनार्थ दिन—रात खोल कर रखा जाता है, पूरे क्षेत्र में यह मेला काफी प्रसिद्द है. हिन्दू एवं मुस्लिम दोनों सम्प्रदाय के लोग इस मेले का बड़ी बेसब्री से पूरे साल इंतजार करते हैं |

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